(हे ईश्वर आप अतुलित (जिसे तौला नहीं जा सकता है ) बल एक स्वामी हैं। धाम से आशय है की ऐसे बल को 'ग्रहण' करने वाला। आपका बदन सोने के पर्वत के समान हैं। आप दैत्य के वंश को समाप्त करने हेतु अग्नि रूप में हैं और ज्ञानियों के रक्षक हैं। आप समस्त गुणों को धारण करने वाले हैं और वानरों, बंदरों के आप स्वामी हैं। आप रघुपति, श्री राम जी के अत्यंत ही प्रिय हैं। आप वायु पुत्र हैं जिन्हें हम सभी नमन करते हैं।
महावीर हनुमान गोसाई, हम है तुमरे शरणाई, महावीर हनुमान गोसाई, हम है तुमरे शरणाई, जय हनुमान, जय हनुमान।
एक हाथ गदा तोहे सोहे, एह हाथ गिरिधारी, सिन्दूर सजीली प्रतिमा, मंदिर में मेरे समाई। दर्शन करत मोरी अखियाँ, भक्ति की ज्योति जगाई, महावीर हनुमान गोसाई, हम है तुमरे शरणाई, महावीर हनुमान गोसाई, हम है तुमरे शरणाई, जय हनुमान, जय हनुमान।
वानर मुखमंडल प्यारा, दर्शन से मिटे भय सारा, है दिव्य नयन, ज्योतिर्मय, हर ले जीवन अँधियारा, श्री राम नाम की चदरिया, तन पे तुम्हारे लहराई, महावीर हनुमान गोसाई, हम है तुमरे शरणाई, जय हनुमान, जय हनुमान।
जिसपर कृपा हो तुम्हारी, बन जाए बिगड़ी सारी, वह राम भक्ति पा जाए, तुम करते नित रखवाली, तन की साँसों से जपूं मैं, हनुमान सिया रघुराई, महावीर हनुमान गोसाई, हम है तुमरे शरणाई,
Hanuman Bhajan Lyrics Hindi
जय हनुमान, जय हनुमान।
हरिओम शरण (26 सितंबर 1932 - 17 दिसंबर 2007) भारतीय भक्ति संगीत के प्रमुख गायक और गीतकार थे। उनका जीवन और संगीत हिंदू देवी-देवताओं विशेष रूप से भगवान राम, माता सीता और भगवान हनुमान की भक्ति में समर्पित रहा। 1970 के दशक में हरिओम शरण ने भजन गायन के क्षेत्र में अपनी एक विशेष पहचान बनाई। उनके प्रसिद्ध एल्बमों में प्रेमांजलि, पुष्पांजलि, और दा ता एक राम जैसे एल्बम शामिल हैं, जिनमें उनके भक्ति गीतों की मिठास और आध्यात्मिकता का अनुभव होता है।
उनके भजनों में से राम तेरी गंगा मैली चढ़ार ओढ़के कैसी, आरती कुंज बिहारी की, ऐसा प्यार बहा दे मैया, श्री राधे गोविंदा, हनुमान चालीसा और गोविंद जय गोपाल जय जय जैसे भजन आज भी भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं। उनके भजनों में ऐसी मधुरता और सादगी है जो सीधे भक्तों के हृदय में उतरती है।
35 वर्षों के संगीत करियर में हरिओम शरण ने 20 से अधिक भक्ति एल्बम रिलीज़ किए, जो आज भी भक्ति संगीत प्रेमियों के लिए अमूल्य धरोहर बने हुए हैं। उनकी आवाज़ और भजनों में भक्ति का ऐसा प्रवाह था, जिससे श्रोता भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा में डूब जाते थे।