जिस दिन कन्हैया तेरा दर्शन होगा भजन

जिस दिन कन्हैया तेरा दर्शन होगा भजन

जिस दिन कन्हैया,
तेरा दर्शन होगा,
जिस दिन कन्हैया,
तेरा दर्शन होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा,
मेरा सुंदर सपना,
अपना कब पूरा होगा,
जिस दिन कन्हैया,
तेरा दर्शन होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा।

आया शरण तेरी,
बनके भिखारी मैं,
तुम तो दयालु प्रभु जी,
तेरा पुजारी मैं,
होगा मिलन जब,
तुम्हारा संग होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा,
मेरा सुंदर सपना,
अपना कब पूरा होगा,
जिस दिन कन्हैया,
तेरा दर्शन होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा।

तन मन धन सब तेरे,
पर मैंने वारा है,
तेरा दिया मैंने,
तुम ही को दिया है,
मुझ पर दयालु,
कब मन तेरा होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा,
मेरा सुंदर सपना,
अपना कब पूरा होगा,
जिस दिन कन्हैया,
तेरा दर्शन होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा।

कैसा जगत में,
तूने खेल रचाया रे,
अपना बने ना कोई,
बने ना पराया रे,
अब तो बता दे,
तू कब मेरा होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा,
मेरा सुंदर सपना,
अपना कब पूरा होगा,
जिस दिन कन्हैया,
तेरा दर्शन होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा।

कैसी रे कन्हैया,
तूने प्रीत निभाई रे,
पहले तू नाता जोड़े,
फिर दे जुदाई रे,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा,
मेरा सुंदर सपना,
अपना कब पूरा होगा,
जिस दिन कन्हैया,
तेरा दर्शन होगा,
उस दिन सफल,
मेरा जीवन होगा।

जिस दिन कन्हैया तेरा दर्शन होगा |JIS DIN KANHAIYA TERA DARSHAN HOGA | #SHYAMBHAJAN

SINGER, LYRICIS- RAJ KUMAR SAHNI

जब कन्हैया का दर्शन होने की बात आती है, तो दिल में यही भरोसा जागता है कि उस दिन जीवन सचमुच सफल हो जाएगा। भिखारी बनकर शरण आना, तन‑मन‑धन सब कुछ उन पर छोड़ देना – यही वह भावना है जो भक्ति को गहरा और असली बना देती है। तब जीवन का हर उधार चुकाने जैसा लगता है, मानो कन्हैया के संग जो नाता टूटा था, वही फिर पूरा हो जाएगा। जय श्री कृष्ण जी।

जगत का खेल ऐसा बना हुआ है कि लगता है कोई अपना भी नहीं, पराया भी नहीं, फिर भी दिल टिक जाता है उसी नाम पर जो “कन्हैया” कहलाता है। पहले नाता जोड़ना और फिर हल्की जुदाई का अनुभव इतनी मीठी प्रीत बना देता है कि दर्शन की प्रतीक्षा ही जीवन की सजीवता बन जाती है। जब वह मिलन होता है, तो सारे सपने एक झटके में आँखों के सामने जीवित हो जाते हैं, जीवन उस दिन से बदलता ही जाता है। इश्वर का आशर्वाद हम सब पर बना रहे, यह दर्शन की आस दिल को हमेशा जगाए रखे। जय श्री कृष्ण जी। 

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