मुसाफिर जागते रहना नगर में चोर भजन
मुसाफिर जागते रहना नगर में चोर भजन
मुसाफिर जागते रहना,नगर में चोर आते है,
मुसाफिर जागते रहना,
नगर में चोर आते हैं।
संभालो माल अपने को,
बांधकर धर सिरहाने में,
जरा सी नींद गफलत में,
झपट गठरी उठाते हैं,
मुसाफिर जागते रहना,
नगर में चोर आते हैं।
कपट का है यहां चलन,
सभी व्यापार दिनराती,
दिखाकर सूरते सुंदर,
जाल में यह फसाते हैं,
मुसाफिर जागते रहना,
नगर में चोर आते हैं।
कभी किसी का नहीं करना,
भरोसा इस जमाने में,
लगाकर प्रीत मतलब से,
हर पल में हटाते हैं,
मुसाफिर जागते रहना,
नगर में चोर आते हैं।
ठिकाना है नहीं करना,
किसी का इस सराय में,
वो ब्रह्मा नन्द दिन दिन मे,
सभी चल चल कर जाते हैं,
मुसाफिर जागते रहना,
नगर में चोर आते हैं।
मुसाफिर जागते रहना,
नगर में चोर आतेे है,
मुसाफिर जागते रहना,
नगर में चोर आते हैं।
मुसािफर जागते रहना नगर में चोर आतेे है | Musafir Jaagte Rehna Nagar Mein Chor Aate Hain | Satsangi
जिंदगी इस राह की तरह है जहां हर पल सावधानी रखनी पड़ती है। रात हो या दिन, चारों तरफ ऐसे लोग घूमते रहते हैं जो बाहर से अच्छे दिखते हैं लेकिन अंदर से माल की ताक में रहते हैं। जरा सी लापरवाही या नींद में गफलत हुई कि वे झपटकर सब कुछ उठा ले जाते हैं। इसलिए मुसाफिर को हमेशा जागते रहना चाहिए, अपनी चीजों को संभालकर रखना चाहिए।
यहां कपट का चलन बहुत है। लोग सुंदर मुस्कान और मीठी बातों से जाल बिछाते हैं। मतलब पूरा होते ही रिश्ता तोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। किसी पर पूरा भरोसा करना या प्रेम लगाकर दिल खोल देना खतरनाक हो सकता है। इस सराय में कोई ठिकाना नहीं, सब आते हैं और चले जाते हैं। ब्रह्मा से लेकर नंद तक, हर कोई दिन-दिन भर चलता रहता है।
जब भी मन ढीला पड़ने लगे या आसानी से किसी की बात में आ जाए, तब याद कर लो कि रास्ता लंबा है और सावधानी ही सबसे बड़ा साथी है। जागते रहो, तो चोर कभी पास नहीं आ पाते और सफर सुरक्षित रहता है।
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