श्री कृष्ण शरणं मम बन्सी मदन गोपाल की बाजत गहर गम्भीर कृष्णा त बाजत सुनी जमुना जी के तीर मॊर मुकुट क़र बांसुरी गाय़त रात सुब्हे कानन में कुण्डल दिखे और गुंघर वाले केश श्याम तेरी वंसी बजे धीरे धीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे बजे धीरे धीरे हो जमुना के तीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे इति गोकुल उत श्री वृन्दाबन बीच में जमुना बहे धीरे धीरे बहे धीरे धीरे हो जमुना के तीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे इति जशुदा उत रोहणी मैया बीच में कान्हा चले धीरे धीरे चले धीरे धीरे हो जमुना के तीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे इति गहेंवर उत घोरसांकरी बीच में माखन लुटे धीरे धीरे लुटे धीरे धीरे हो जमुना के तीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे इति जमुना तट उतने पनघट बीच में गगरी उछे धीरे धीरे उछे धीरे धीरे हो जमुना के तीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे इति जमुना तट उत वंसी बट बीच में रास रचे धीरे धीरे रचे धीरे धीरे हो जमुना के तीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे इति ललिता उत सखी बिसाखा बीच में राधे चले धीरे धीरे चले धीरे धीरे हो जमुना के तीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे इति राधा कुण्ड उत गोवरधन बीच में गया चरे धीरे धीरे चरे धीरे धीरे हो जमुना के तीरे कान्हा तेरी वंसी बजे धीरे धीरे