हम परदेसी पंछी इनि देश का नाई भजन
हम परदेसी पंछी इनि देश का नाई भजन
एजी सरवर तरवर संत जना,और चौथा बरसे मेघ,
अरे परमारथ के कारणे,
गुरु चारो धारी देह।
हम परदेसी पंछी रे साधु भाई,
इनि देश का नाई,
इनि देश रा लोग अचेता,
पल पल परले में जाई,
म्हारा साधु भाई इनि देश रा नाई।
मुख बिना बोलना,
ने पग बिना चलना,
बिना पंखो से उड़ जाई,
हा इन सुरत की या लोई हमारी,
अनहद में रम जाई,
म्हारा साधु भाई इनि देश रा नाई।
छाया में बेठू तो अग्नि सी लागे,
धूप अधिक शितलाइ,
छाया धूप से मोरे सतगुरु न्यारा,
मैं सतगुरु के रमाई,
म्हारा साधु भाई इनि देश रा नाई।
आठो पहाड़ अड़ा रहे आसन,
कबहू न उतरेगा साई,
ज्ञानी रे ध्यानी वा,
पच पच मार गया,
इनी देश के रमाई,
म्हारा साधु भाई इनि देश रा नाई।
निर्गुण रूपी है मेरे दाता,
सिरगुण नाम धराया,
मन पवन दोनो नहीं पाहुचे,
इनी देश के रमाई,
म्हारा साधु भाई इनि देश रा नाई।
नख शीख नैन शरीर हमारा,
सतगुरु अमर कराई,
कहे कबीर मिलो निर्गुण से,
अजर अमर हो जाई।
हम परदेसी पंछी | Hum pardesi panchhi | Geeta Parag | Kabir Folk 9669359081
Main Vocal : Geeta Parag
Chours & Majira : Leela Parag and Tanu Parag
Timki/Nagari : Singaram Parag
Dholak. : Ankit Malviya
Harmonium : Gabbar Pachalaniya
Violin. : Devnarayan Saroliya
Venue : Lunyakhedi,Kabir aashram
Venue support : Padmshree Prahlad singh Tipaniya
यह भजन भी देखिये
झाड़ू म्हारो फिर रयो निर्गुण माय
राम नाम तू लेले बन्दे राम नाम से तर जाएगा भजन
तन का क्यों करता गरुर कबीर भजन