कैलाश के निवासी नमो बार बार हूं शिव भजन

कैलाश के निवासी नमो बार बार हूं शिव भजन

कैलाश के निवासी,
नमो बार बार हूं,
आयो शरण तिहरी,
प्रभु तार तार तू,
कैलाश के निवासी,
नमो बार बार हूं।

भक्तो को कभी शिव,
तूने विनाश ना किया,
मांगा जिन्हें जो,
चाह वरदान दे दिया
बड़ा है तेरा दयाजा,
बड़ा दातर तू,
आयो शरण तिहारी,
प्रभु तार तार तू।

बखन क्या करो,
मैं राखो के ढेर का,
चपती भाभोत में,
है खजाना कुबेर का
हैं गैंग धर मुक्ति द्वार,
ओंकार तू,
आयो शरण तिहारी,
प्रभु तार तार तू।

क्या क्या नहीं दिया,
हम क्या प्रमाण दे,
बस गई त्रिलोक,
शंभो तेरे दान से,
ज़हर पिया जीवन दिया,
कितना उदार तू,
कितना उदार तू,
आयो शरण तिहारी,
प्रभु तार तार तू।

तेरी कृपा बिना ना,
हेनले एक भी अनु,
लेते हैं स्वास तेरी,
दया से कानू कानू,
कहे दास एक बार,
मुझको निहार तू,
आयो शरण तिहारी,
प्रभु तार तार तू।

कैलाश के निवासी,
नमो बार बार हूं,
आयो शरण तिहारी,
प्रभु तार तार तू।

कैलाश के निवासी,
नमो बार बार हूं,
आयो शरण तिहरी,
प्रभु तार तार तू,
कैलाश के निवासी,
नमो बार बार हूं।

कैलाश के निवासी | Kailash Ke Nivasi | Master Rana | Shiv Bhajan | Soormandir

जो शरण देता है, वह ठहराव और विश्वास का स्रोत बन जाता है। कठिन से कठिन परिस्तिथि में भी जब कोई परपोरा बने तो जीवन की उलझनें सुलझने लगती हैं; उसी दैवी ममत्व से हर भय छँट जाता है और मन स्थिर हो जाता है। अनेक प्रकार की परेशानियाँ और बंधन जो भीतर-कहकर थकी हुई आत्मा को घेर लेते हैं, उसका बोझ उसी दयालुता के आगे हल्का हो जाता है। उन कठिन पलों में जो सहारा मिलता है, वह सिर्फ संकट दूर करने वाला नहीं, बल्कि दिल को थामने वाला, मार्ग दिखाने वाला और आत्मा को संभालने वाला भी होता है। 

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