भाव के दो आँसू तू चढ़ा के देख ले भजन
भाव के दो आँसू तू चढ़ा के देख ले भजन
भाव के दो आँसू,
तू चढ़ा के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
मायत को भी मायत है,
यो सेठ सांवरो।
मायत के जो बस में ना,
वो इनसे मांग लो।
पल्लो अपनो सामने,
बिछा के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
एक तो बता दो,
जिणे बाबो नाट्यो है।
सांवरो तो सबने ही,
खूब बांटो है।
तू भी माथा द्वार पे,
टिका के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
सांवरे के राज में,
तू मौज उड़ा।
श्याम पे ‘कमल’,
विश्वास बढ़ा।
सांवरे ने डोर तू,
थमा के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
भाव के दो आँसू,
तू चढ़ा के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
तू चढ़ा के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
मायत को भी मायत है,
यो सेठ सांवरो।
मायत के जो बस में ना,
वो इनसे मांग लो।
पल्लो अपनो सामने,
बिछा के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
एक तो बता दो,
जिणे बाबो नाट्यो है।
सांवरो तो सबने ही,
खूब बांटो है।
तू भी माथा द्वार पे,
टिका के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
सांवरे के राज में,
तू मौज उड़ा।
श्याम पे ‘कमल’,
विश्वास बढ़ा।
सांवरे ने डोर तू,
थमा के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
भाव के दो आँसू,
तू चढ़ा के देख ले।
सुनसी-सुनसी सांवरो,
सुना के देख ले॥
Bhav ke Do Aansu Chadha Ke Dekh Le - भाव के दो आंसू || Sanjay Mittal ji kirtan - 4K HDR
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तेरे चरणों पर गिरती एक-एक बूंद जैसे भीतर की सारी रिक्तियाँ भर दे; भाव के जो दो आँसू हैं, वे सिर्फ नमी नहीं—वो पवित्र दान हैं जो मन की सच्ची तन्हाई को पहचानकर उसे स्नेह की डोर से बाँध देते हैं। जब इन्हें तू चढ़ा लेता है तो ग़ुमनामी की हर परत हलकी होकर उजास बन जाती है; सुनसान दौर भी तेरी सुनसी मुस्कान में गीत बनकर गूंज उठता है। मेरा सिर जहाँ भी टिके, तेरी छवि की मधुर तसल्ली उसमें जल-सा समा जाए, और उन आँसुओं की कोणियों से निकलती विनम्रता तेरे द्वार तक पहुँच कर दया की परत उखाड़ दे—तब हर दर्द स्वयं प्यार में बदलकर लौटता है। तू एक बार डोर थाम ले, तो मेरा भरोसा पक्का हो जाता है; वही आँसू जो पहले बोझ थे, तेरे प्रेम की राख में सोना बनकर चमक उठते हैं।
गायक : श्री संजय मित्तल जी !!
छायांकन : श्री श्याम स्टूडियो Live - 7500905242 ||
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Author - Saroj Jangir
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