मेरी राधा रानी सरकार अब के मोहे लगा दो भजन
मेरी राधा रानी सरकार अब के मोहे लगा दो भजन
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार,
मैं तो छोड़ के आई संसार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
तुमसे दिल की जो बात कहूं,
तुम बिन लाडो ना एक पल रहूं,
सदा निहारूं तिहारो द्वार,
अब के मोहे लगा दो पार,
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
झूठे जग ने बहुत है ठगा,
यहां कोई ना अपना सगा,
एक तुम ही हो मेरी रिश्तेदार,
अब के मोहे लगा दो पार,
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
तेरे चरणों की दासी बनूं,
नाम तिहारो ही हरदम जपूं,
‘अभिषेक’ की तुमसे आस,
अब के मोहे लगा दो पार,
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार,
मैं तो छोड़ के आई संसार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
अब के मोहे लगा दो पार,
मैं तो छोड़ के आई संसार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
तुमसे दिल की जो बात कहूं,
तुम बिन लाडो ना एक पल रहूं,
सदा निहारूं तिहारो द्वार,
अब के मोहे लगा दो पार,
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
झूठे जग ने बहुत है ठगा,
यहां कोई ना अपना सगा,
एक तुम ही हो मेरी रिश्तेदार,
अब के मोहे लगा दो पार,
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
तेरे चरणों की दासी बनूं,
नाम तिहारो ही हरदम जपूं,
‘अभिषेक’ की तुमसे आस,
अब के मोहे लगा दो पार,
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
मेरी राधा रानी सरकार,
अब के मोहे लगा दो पार,
मैं तो छोड़ के आई संसार,
अब के मोहे लगा दो पार॥
New Radha Rani Bhajan 2026 | मेरी राधारानी सरकार अब की मोहे लगा दो पार | Abhishek Tiwari
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Singer:- Abhishek Tiwari
Tabla:- Vikas Sharma
Dholak:- Aniket Tyagi
Keyboard:- Umesh Singh
Chrous:- Anupam Pandey
Octopad:- Bajrangi
Lyrics:- Abhishek Tiwari
Tabla:- Vikas Sharma
Dholak:- Aniket Tyagi
Keyboard:- Umesh Singh
Chrous:- Anupam Pandey
Octopad:- Bajrangi
Lyrics:- Abhishek Tiwari
तेरे चरणों की आस में घर-बार की हर गूँज मंद पड़ जाती है; दुनिया की प्रेम-भंगिमा और छली हुई मुस्कानें सब फीकी लगती हैं जब भीतर राधा की ही छवि जल उठे। तेरे बिना हर क्षण अधूरा, हर साँस परांठी-सी सूनी; तेरी दी हुई एक झलक ही जीवन को पूरा कर देती है। झूठे रिश्तों की ठगमत मिटकर तेरे रूप की एक निष्ठुर मुस्कान भी अपना-सा लगती है, क्योंकि तू वह एकमात्र सगा है जो बिना शर्त अपनाती है। तेरे चरणों की दासी बनकर जब नाम जुबां पर बिखरता है, तो हर कण में शान्ति का अमृत उतर आता है और अभिषेक की आशा में मन एक पवित्र तवायफ सा नतमस्तक हो उठता है। संसार छोड़ देने का संकल्प अब हल्का नहीं, वरन् प्रेम का एक गहन निर्णय बन गया है—तेरे प्रेम में डूबकर ही पार लगने की तीव्र तृष्णा सी जलती है।
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Author - Saroj Jangir
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