मैं कैसे भूल जाऊं अपने प्रभु हनुमान को भजन

मैं कैसे भूल जाऊं अपने प्रभु हनुमान को भजन

मैं कैसे भूल जाऊं,
अपने प्रभु हनुमान को,
किस्मत को बनाते हैं,
भाव पार लगाते हैं,
दूर कैसे मैं रह पाऊं,
दूर कैसे मैं रह पाऊं,
मैं कैसे भूल जाऊं,
अपने प्रभु हनुमान को।

हर पल दिया सहारा मुझको,
अपने गले लगाया,
दुनिया की सारी खुशियों से,
मेरा घर द्वार सजाया,
मैं कुछ भी समझ ना पाऊं,
मैं कुछ भी समझ ना पाऊं,
मैं कैसे मूल चुकाऊं,
अपने प्रभु हनुमान को,
मैं कैसे भूल जाऊं,
अपने प्रभु हनुमान को।

जब जब ध्यान किया मैंने,
तब संकटमोचन आए,
आने वाली हर विघ्नों से,
मुझको सदा ये बचाए,
मैं तो कपि दास कहाऊं,
मैं तो कपि दास कहाऊं,
यह देंह समूल चढ़ाऊं,
अपने प्रभु हनुमान को,
मैं कैसे भूल जाऊं,
अपने प्रभु हनुमान को।

अंधियारा मेरे उर का,
हर ज्ञान का दीप जलाया,
लोक मेरा परलोक संवारा,
जीवन धन्य बनाया,
कैसे मैं ये बिसराऊं,
कैसे मैं ये बिसराऊं
मैं निसदीन शीश झुकाऊं,
अपने प्रभु हनुमान को,
मैं कैसे भूल जाऊं,
अपने प्रभु हनुमान को।


अपने प्रभु हनुमान - Rohit Tiwari Baba - Apne Prabhu Hanuman - Shree Hanuman Bhajan - Bhakt Ki Pukar

Song : Apne Prabhu Hanuman
Singer : Rohit Tiwari Baba
Lyrics : Dhaneshvar Prasad (Dr. Purodha Ji)
Music Director : Rohit Tiwari Baba
Recording : Aadya Music Studio Robertsganj,Sonebhadra,UP
Poster & Video : Aadya Creations
Digital : Aadya Music Studio (7007349209)
Producer : Seema Tiwari
Music Label : Rohit Tiwari Baba 

मन कभी यह नहीं सोच पाता कि वह हनुमान जी को कैसे भूल सकता है, क्योंकि जहाँ धरती अपने आप में डोलने लगती है, वहाँ हनुमान ही किस्मत को बनाकर सहारा बन जाते हैं। जब संकट अँधेरे से भर आते हैं, तो वही भाव‑पार लगाते हैं, जैसे कोई नैया हर लहर से उठकर फिर बढ़ जाती है। उनके गले से लिपटना, उनकी छाती से सहारा पाना, और घर के द्वार पर उनकी आहट से आने वाली खुशी – यह सब किसी रिश्ते की तरह गहरा हो जाता है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता।

जब भी ध्यान लगाया जाता है, तो हनुमान जी संकटमोचन बनकर आते हैं, जैसे सामने कोई भी विघ्न हो, वहीं रास्ता खुल जाता है। जिस देह को वे अपने नाम पर चढ़ा लेते हैं, उसमें फिर वही ताकत बस जाती है। अँधियारा भी ज्ञान की रोशनी में बदल जाता है, लोक और परलोक दोनों एक ही सजे हुए आँगन जैसे लगने लगते हैं। ऐसे में यह सोच कैसे आ सकती है कि अपने प्रभु हनुमान को याद ही न किया जाए – वे तो हर दिन सिर झुके बैठे रहने का कारण बनते हैं, अपने आप ही दिल को शुक्र की भाषा सिखला देते हैं। 

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