मनोजवम मारुत तुल्य वेगम जितेंद्रियम भजन

मनोजवम मारुत तुल्य वेगम जितेंद्रियम भजन

मनोजवम मारुत तुल्य वेगम, जितेंद्रियम बुद्धिमतां वरिष्ठं
वातात्मजं वानारायूथ मुख्यम, श्रीराम दूतं शरणम प्रपद्धे
मंगल मूरति, मारुतनंदन, भक्तविभूषण जय हनुमान
सकल अमंगल, मूल निकंदन, संकट मोचन जय हनुमान
जय हनुमान जय हनुमान

जय हनुमान जय हनुमान, जय हनुमान जय हनुमान
पवन तनय संतन हितकारी, ह्रदय बिराजत अवधविहारी
राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान
जय हनुमान ...

मातुपिता, गुरु, गनपति, सारद, सिवा समेत संभु सुख नारद
राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान
जय हनुमान ...
चरन बंदी बिनबौ सब काहूँ, देहु रामपद नेह निबाहूं
राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान
जय हनुमान ...

बंदौ राम लखन बैदेही, जे तुलसी के परम सनेही
राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान
जय हनुमान ...

मनोजवम मारुत तुल्य वेगम, जितेंद्रियम बुद्धिमतां वरिष्ठं
वातात्मजं वानारायूथ मुख्यम, श्रीराम दूतं शरणम प्रपद्धे


|| संकट मोचन जय हनुमान || .. पूज्य संत श्री तुलसीदास जी की अलौकिक रचना ! 

हनुमान जी की शक्ति देखकर मन दंग रह जाता है। उनकी गति मन के समान तेज है, हवा की तरह वेगवान हैं। इंद्रियों पर पूरा नियंत्रण रखते हैं और बुद्धिमानों में सबसे ऊंचे स्थान पर हैं। पवन के पुत्र, वानरों की सेना के मुखिया और श्री राम के सबसे प्रिय दूत – इनके चरणों में शरण लेने से सारे संकट दूर हो जाते हैं। मंगल रूप, मारुत नंदन, भक्तों के लिए आभूषण जैसे हैं। अमंगल की जड़ काटने वाले, संकट मोचन बजरंगबली हर मुश्किल में साथ खड़े हो जाते हैं।


हनुमान जी संतों के हितकारी हैं, हृदय में अवध विहारी राम के साथ विराजते हैं। राम, लक्ष्मण, सीता के चरणों में उनका भक्ति रूप सदा चमकता है। माता-पिता, गुरु, गणेश, सरस्वती, शिव और नारद सभी के साथ उनका सुखमय रूप याद आता है। चरणों की वंदना करते ही राम के पदों में प्रेम निभाने की शक्ति मिलती है। तुलसी के परम स्नेही राम-लक्ष्मण-सीता को बंदन करते हुए जीवन आसान और भक्तिमय हो जाता है। उनके नाम से मन शांत रहता है, हर काम में बल और बुद्धि मिलती है। 

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