मोहन मुरली वाल्या दुपट्टा मेरा रंग दे भजन

मोहन मुरली वाल्या दुपट्टा मेरा रंग दे भजन


वो जो भानु बाबा की दुलारी है,
बड़ी सुंदर और बड़ी प्यारी है।
मैं क्यों अपनी परवाह करूं,
मेरी श्यामा जू हितकारी है।
मेरी लाडो जिन पर रीझ जाए, उनको ही ब्रज में बुलाती है,
उन्हें आँचल में बिठला करके, प्यारी नित-नित प्यार लुटाती है।
वो जो श्यामा जी की अटारी है,
हमें प्राणों से भी प्यारी है।
मैं क्यों अपनी परवाह करूं,
मेरी श्यामा जू हितकारी है।
करुणा मई श्यामा प्यारी है, अधमों को भी लाड़ लड़ाती है।
मुझ जैसी कपटी पापी को, प्यारी नित नए लाड़ लड़ाती है।
कोई भाव से राधा नाम कहे, प्यारी ठाकुर से मिलवाती है।
वो जो भानु बाबा की दुलारी है,
बड़ी सुंदर और बड़ी प्यारी है।
अब एक ही आस मेरे मन की, मेरा हर अंग राधा नाम कहे।
दिन-रैन ही नाम भजूं प्यारी, और नित ही दर्शन होता रहे।
जब दृष्टि पड़ी तेरी चौखट पर, सब सुध-बुध तो परि वारी है।
वो जो भानु बाबा की दुलारी है,
बड़ी सुंदर और बड़ी प्यारी है।



दुपट्टा मेरा रंग दे (स्पेशल होली भजन 3) 2026||Charanjit Bhajan Mandali Ferozepur||Punjab 9780041749

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Radhe radhe Bhajan.
Ferozepur Punjab
 
साधक पूरे मन से श्याम के प्रेम में भीग जाने की विनती करता है। बाहरी दुपट्टा रंगाने का आग्रह वास्तव में अपने मन, स्वभाव और जीवन को श्याम के ही रंग में रंगाने की लालसा है। जो रंग उनके मुकुट, माला, वस्त्र, ऊपरी ओढ़नी, राधा और सभी रसमग्न साधकों पर चढ़ा है, वही दिव्य रंग अपने जीवन पर भी चढ़ जाए, यही आग्रह बार‑बार उमड़ता है। साधक का अपना अलग कोई अहं, अलग पहचान या अलग इच्छा न रहे, बस हर श्वास में, हर भाव में और हर कर्म में श्याम की छाप दिखे, यही सबसे बड़ी कामना बन जाती है।

श्रीकृष्ण मोहन, मुरलीमनोहर और श्यामसुंदर रूप में अनंत करुणा और प्रेम के सागर हैं। उनके मुकुट से लेकर पीताम्बर और कंबल तक प्रत्येक अलंकार केवल सिंगार नहीं, दिव्यता, संरक्षण और कृपा का प्रतीक है, जिन्हें निहारते‑निहारते मन अपने आप शरणागत हो जाता है। राधा पर जो प्रेम का अनोखा रंग चढ़ा, वही रंग जब साधकों पर उतरता है तो वे सांसारिक आसक्तियों को भूलकर केवल नाम, स्वरूप और लीला में रमे रहते हैं। श्याम का स्पर्श मन पर पड़ जाए तो कड़वाहट, स्वार्थ और अंधकार पिघलने लगते हैं और भीतर एक सरल, प्रेमपूर्ण और ईश्वर को समर्पित जीवन खिल उठता है; यही श्याम रंग की सबसे बड़ी महिमा है।

 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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