श्राद्ध एक हिंदू धार्मिक अनुष्ठान है जो मृत पूर्वजों के लिए किया जाता है। श्राद्ध में, वंशज पितरों के लिए भोजन, पानी, और अन्य सामग्री का अर्पण करते हैं। श्राद्ध का उद्देश्य पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करना और उनके आशीर्वाद प्राप्त करना है। श्राद्ध को पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है, जो हिंदू कैलेंडर में भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होता है और अश्विन अमावस्या पर समाप्त होता है। पितृ पक्ष को पितृ लोक में पितरों का आगमन माना जाता है। इस अवधि के दौरान, वंशज पितरों के लिए श्राद्ध करके उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
रातिजगो मान लिज्यो घरका को पितर
रातिजगो मान लिज्यो, घरका को पितर, रातिजगो मान लिज्यो घरका को, यो पाटा भरा दियो पितरा को।
नौ महिना माता दुख पायी, उंधो र झुल्यो गरभ क माही, यो तो विकट काम छो खतरा को, पाटो भरा दिया पितरा को।
पुरा दिन हुया पीड चलाई, दाई माई न तुरन्त बुलाई, या तो पिंड छुडा दिया अबला को, पाटो भरा दिया पितरा को।
परभातिया थारो जनम हुयायो, कंचन सोना को थाल बजायो, दिल खुशी हो गयो घरका को, पाटो भरा दिया पितरा को।
बहिन भुआ न थार नुत बुलाया, सांठ्या बांदरवाल बंधाया, हुयो मंगलाचार लुगायाँ को, पाटो भरा दिया पितरा को।
बड़ा बड़ा पंचा न बुलाई, चुडा मांदल्या को मुर्हत कढाई, जोशी टको माँग लियो पतडा को, पाटो भरा दिया पितरा को।
भक्त मंडल पितरा न मनाव, आई मावस खीर बनाव, थे तो घरका सु आंतरो मत राखो, पाटो भरा दिया पितरा को।
रातिजगो मान लिज्यो घरका को, यो पाटा भरा दियो पितरा को।
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