सुनो जी कथा सुनो सोमवार व्रत कथा भजन
सुनो जी कथा सुनो सोमवार व्रत कथा भजन
सुनो सुनो सुनो सुनो
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
एक समय की बात है एक सेठ बड़ा धनवान था
सारे नगर में हर कोई उसका करता आदरमान था
दयालु और दानी उसका मन बड़ा ही निर्मल था
शिव की भक्ति में वो खोया रहता हर एक पल था
बड़े नियम से नित्य दिन वो शिव के मंदिर जाता था
श्रद्धा भाव से करता पूजन शिव का ध्यान लगाता था
खाते पीते सोते जागते बम बम भोले कहता था
इतनी भक्ति करने पर भी चिंता में वो रहता था
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
एक दिन माँ पार्वती बोली भोले बाबा से
मन में थी एक बात जो खोली भोले बाबा से
सच्ची श्रद्धा से आपका करता सच्चा ध्यान है
फिर भी स्वामी सेठ ये रहता क्यों परेशान है
भोले बाबा बोले इसके घर कोई संतान नहीं
सेठ के बाद इसका आगे चलना खानदान नहीं
वैसे सेठ के जीवन में कोई दुःख नहीं
पर कभी संतान का मिलना इसको सुख नहीं
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
बोली माता पार्वती स्वामी ये अन्याय है
सच्चा है ये भक्त आपका देना इसको न्याय है
स्वामी सेठ की पीड़ा का कोई हल तो देना होगा
सेवक है ये आपका इसको भक्तिपल तो देना होगा
सुनके विनती पार्वती की भोले बाबा मुस्काए
दोनों मंदिर आ पहुंचे तो शिव ने ऐसे वचन सुनाए
तुम जो कहती हो तो देवी पुत्र इसे मिल जाएगा
बारह वर्ष की आयु होगी फिर वो मृत्यु पाएगा
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
ये सब सुनकर सेठ को ख़ुशी हुई ना दुःख हुआ
करता रहा वो नित्य पूजन शिव से ना बेमुख हुआ
कुछ समय के बाद उसकी पत्नी गर्भवती हुई
खुशियों के थे आंसू चलके वो प्रसन्न आती हुई
लेकिन सेठ ने कोई भी यज्ञ किया ना खुशी मनाई
ना हस्ता ना रोता था वो गुमसुम देता सदा दिखाई
जिस दिन घर में सेठ के पुत्र ने था जन्म लिया
उस दिन सबने ख़ुशी मनाई ढोल बजाए भजन किया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
उस ख़ुशी के पल सेठ बड़ा उदास था
वो बालक की आयु को लेकर बड़ा निराश था
अपने मन में रखा दबाके भेद किसी को बताया नहीं
भक्ति पूजा करता रहा सेठ वो घबराया नहीं
हँसते खेलते बालक जब ग्यारह वर्ष का हो गया
घटती उसकी आयु देखके वो चिंता में खो गया
बालक की जो माता थी खुश बड़ी थी रहने लगी
अब हम इसका ब्याह रचाएं सेठ से वो कहने लगी
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
सेठ बोला पत्नी से विवाह बाद में देखेंगे
पहले अपने बालक को काशी पढ़ने भेजेंगे
तभी सेठ ने बालक के मां जी को बुलवाया
उसको धन की थैली सेठ ने था समझाया
तुम मेरे को काशी पढ़ने ले जाओ
रास्ते में तुम जहां रुको हवन कराओ यज्ञ रचाओ
साधू संत ब्राह्मणों को दे संदेसा बुलवाना
सबको वस्त्र दक्षिणा देना श्रद्धा से भोजन करवाना
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
दोनों मां भांजा मिलके यज्ञ रचाते जा रहे
साधू संत ब्राह्मणों को भोज कराते जा रहे
आगे उनके रास्ते में नगर था आया
उस नगर के राजा ने था बेटी का ब्याह रचाया
राज कुमारी ब्याहने को जिस लड़के ने आना था
राज कुमार था पर वो एक काना था
लड़के के पिता ने ये भेद सबसे छुपाया था
बात कहीं ये खुल ना जाए अंदर से घबराया था
सोच रहा था टल ना जाए शादी है जो होने वाली
कन्या के माता पिता कहीं लोटा ना दें खाली
इसी चिंता में जो उसको सेठ का लड़का दिया दिखाई
उस लड़के को देखा तो उसके मन में युक्ति आई
क्यों ना इसको ही दूल्हा हम बनाकर ले जाएँ
शादी के पंडाल में इसको घोड़ी बैठकर ले जाएँ
उसने लड़के के मां को सारा अपना भेद बताया
हाथ जोड़कर मिन्नत करके उसने मां को मनाया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
घोड़ी पर बिठाकर उसको दरवाजे तक ले आए
फिर सोचा आगे का भी काम इसीसे करवाएं
उसने लड़के के मामा को मिन्नत करके फिर मनाया
फेरे और कन्यादान तक उसी को बैठाया
ख़ुशी ख़ुशी जब शादी के सारे कारज हो गए
मामा भांजा दोनों मिलके काशी के रास्ते को गए
पर जाने से पहले लड़के ने कुछ ऐसा काम किया
उसने राजकुमारी की चुनरी पे सब लिख दिया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
वैसे तो ये शादी तेरी हुई मेरे साथ है
वो लड़का है काना जिसको देना तेरा हाथ है
झूठे हैं वो लड़के वाले तुमसे सच बता रहा हूँ
मैं तो मामा के संग आगे काशी पढ़ने जा रहा हूँ
राजकुमारी ने वो सारा लिखा हुआ था पढ़ लिया
उसने डोली में जाने को साफ़ मना कर दिया
जिससे शादी हुई है मेरी वो तो काशी गया चल
उसी का रास्ता देखूंगी मैं आएगा वो कब भला
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
राजकुमारी ने पिता को सारा सच बता दिया
राजा ने बारात को खाली ही लोटा दिया
उधर लड़का मामा के संग काशी नगरी पहुँच गया
गुरुकुल जाकर विद्या वो पाने में था जुट गया
जिस दिन लड़का सेठ का हुआ बारह वर्ष का
यज्ञ भंडारा चल रहा था समाया बड़ा था हर्ष का
और लड़के ने अचानक मामा से आकर कहा
मेरी तबियत ठीक नहीं उसने घबराकर कहा
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
मामा के कहने पर वो अंदर जा कर सो गया
मामा ने आकर जब देखा वो मुर्दा था हो गया
ये देखके मामा को हुआ बड़ा ही दुःख था
रोना धोना नहीं किया बंद किये वो मुख था
सोच रहा था बाहर वो पता यदि चल जाएगा
सफल भंडारा ना होगा कोई कुछ ना खाएगा
चुपचाप उसने सारा भंडारा था निपटाया
भांजा मेरा नहीं रहा बाद में था चिल्लाया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
उसके रोने की आवाज़ आ रही थी जहां से
भोले बाबा पार्वती विचर रहे थे वहाँ से
पास जाकर देखा माता पार्वती हैरान हुई
बालक है ये सेठ का सोचकर परेशान हुई
पार्वती माँ बोली हे स्वामी इसका कष्ट हरो
मृत पड़ा है बालक जो इसको जीवित आप करो
भोले बाबा बोले देवी ऐसा ना हो पाएगा
आयु अपनी जी चुका अब ना वापिस आएगा
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
पार्वती माँ बोली इसके प्राण जो ना आएंगे
बालक के माता पिता तड़प तड़प मर जाएंगे
ये सब सुनकर भोले बाबा ने फिरसे वरदान दिया
सेठ के उस बालक को लंबा जीवन दान दिया
फिर वो लड़का और मामा दोनों वापिस चल दिये
रस्ते में फिर यज्ञ कराए बड़े बड़े भंडार किए
जहां हुई थी शादी उसकी नगर वो ही फिर आया
राजा को जब पता चला उनको महलों में लाया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
राजा बोला लड़के से तू ही मेरा जमाई है
मेरी कन्या की संग तेरे होनी आज विदाई है
बड़े प्रेम से राजा ने उनका आदरमान किया
हाथी घोड़े दास दासियाँ और बड़ा धन दान दिया
अपने घर जब वो लड़का दुल्हन लेकर आता है
उससे पहले मामा उसके घर बतलाने जाता है
इधर सेठ और सेठानी छत पर चढ़े होते हैं
अपनी जान देने को दोनों खड़े होते हैं
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
बाल हमारा घर आया तो तब ही नीचे आएंगे
बुरी खबर जो आई तो छत से कूद जाएंगे
शपथपूर्वक मामा ने उनको जब था समझाया
जल्दी से वो आए नीचे मन था उनका हर्षाया
वह बेटे को घर लाए अपने लगाकर सीने वो
मिलजुलकर सारे लगे खुशी खुशी से जीने वो
सोमवार की व्रत कथा शिव ने जो सुनाई है
सोनू सागर क्या लिखता शिव ने ही लिखवाई है
श्रद्धा से जो सुनता है वो सदगति को जाएगा
वो परिवार समेत शिव महिमा का गुणगान करेगा
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
एक समय की बात है एक सेठ बड़ा धनवान था
सारे नगर में हर कोई उसका करता आदरमान था
दयालु और दानी उसका मन बड़ा ही निर्मल था
शिव की भक्ति में वो खोया रहता हर एक पल था
बड़े नियम से नित्य दिन वो शिव के मंदिर जाता था
श्रद्धा भाव से करता पूजन शिव का ध्यान लगाता था
खाते पीते सोते जागते बम बम भोले कहता था
इतनी भक्ति करने पर भी चिंता में वो रहता था
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
एक दिन माँ पार्वती बोली भोले बाबा से
मन में थी एक बात जो खोली भोले बाबा से
सच्ची श्रद्धा से आपका करता सच्चा ध्यान है
फिर भी स्वामी सेठ ये रहता क्यों परेशान है
भोले बाबा बोले इसके घर कोई संतान नहीं
सेठ के बाद इसका आगे चलना खानदान नहीं
वैसे सेठ के जीवन में कोई दुःख नहीं
पर कभी संतान का मिलना इसको सुख नहीं
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
बोली माता पार्वती स्वामी ये अन्याय है
सच्चा है ये भक्त आपका देना इसको न्याय है
स्वामी सेठ की पीड़ा का कोई हल तो देना होगा
सेवक है ये आपका इसको भक्तिपल तो देना होगा
सुनके विनती पार्वती की भोले बाबा मुस्काए
दोनों मंदिर आ पहुंचे तो शिव ने ऐसे वचन सुनाए
तुम जो कहती हो तो देवी पुत्र इसे मिल जाएगा
बारह वर्ष की आयु होगी फिर वो मृत्यु पाएगा
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
ये सब सुनकर सेठ को ख़ुशी हुई ना दुःख हुआ
करता रहा वो नित्य पूजन शिव से ना बेमुख हुआ
कुछ समय के बाद उसकी पत्नी गर्भवती हुई
खुशियों के थे आंसू चलके वो प्रसन्न आती हुई
लेकिन सेठ ने कोई भी यज्ञ किया ना खुशी मनाई
ना हस्ता ना रोता था वो गुमसुम देता सदा दिखाई
जिस दिन घर में सेठ के पुत्र ने था जन्म लिया
उस दिन सबने ख़ुशी मनाई ढोल बजाए भजन किया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
उस ख़ुशी के पल सेठ बड़ा उदास था
वो बालक की आयु को लेकर बड़ा निराश था
अपने मन में रखा दबाके भेद किसी को बताया नहीं
भक्ति पूजा करता रहा सेठ वो घबराया नहीं
हँसते खेलते बालक जब ग्यारह वर्ष का हो गया
घटती उसकी आयु देखके वो चिंता में खो गया
बालक की जो माता थी खुश बड़ी थी रहने लगी
अब हम इसका ब्याह रचाएं सेठ से वो कहने लगी
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
सेठ बोला पत्नी से विवाह बाद में देखेंगे
पहले अपने बालक को काशी पढ़ने भेजेंगे
तभी सेठ ने बालक के मां जी को बुलवाया
उसको धन की थैली सेठ ने था समझाया
तुम मेरे को काशी पढ़ने ले जाओ
रास्ते में तुम जहां रुको हवन कराओ यज्ञ रचाओ
साधू संत ब्राह्मणों को दे संदेसा बुलवाना
सबको वस्त्र दक्षिणा देना श्रद्धा से भोजन करवाना
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
दोनों मां भांजा मिलके यज्ञ रचाते जा रहे
साधू संत ब्राह्मणों को भोज कराते जा रहे
आगे उनके रास्ते में नगर था आया
उस नगर के राजा ने था बेटी का ब्याह रचाया
राज कुमारी ब्याहने को जिस लड़के ने आना था
राज कुमार था पर वो एक काना था
लड़के के पिता ने ये भेद सबसे छुपाया था
बात कहीं ये खुल ना जाए अंदर से घबराया था
सोच रहा था टल ना जाए शादी है जो होने वाली
कन्या के माता पिता कहीं लोटा ना दें खाली
इसी चिंता में जो उसको सेठ का लड़का दिया दिखाई
उस लड़के को देखा तो उसके मन में युक्ति आई
क्यों ना इसको ही दूल्हा हम बनाकर ले जाएँ
शादी के पंडाल में इसको घोड़ी बैठकर ले जाएँ
उसने लड़के के मां को सारा अपना भेद बताया
हाथ जोड़कर मिन्नत करके उसने मां को मनाया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
घोड़ी पर बिठाकर उसको दरवाजे तक ले आए
फिर सोचा आगे का भी काम इसीसे करवाएं
उसने लड़के के मामा को मिन्नत करके फिर मनाया
फेरे और कन्यादान तक उसी को बैठाया
ख़ुशी ख़ुशी जब शादी के सारे कारज हो गए
मामा भांजा दोनों मिलके काशी के रास्ते को गए
पर जाने से पहले लड़के ने कुछ ऐसा काम किया
उसने राजकुमारी की चुनरी पे सब लिख दिया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
वैसे तो ये शादी तेरी हुई मेरे साथ है
वो लड़का है काना जिसको देना तेरा हाथ है
झूठे हैं वो लड़के वाले तुमसे सच बता रहा हूँ
मैं तो मामा के संग आगे काशी पढ़ने जा रहा हूँ
राजकुमारी ने वो सारा लिखा हुआ था पढ़ लिया
उसने डोली में जाने को साफ़ मना कर दिया
जिससे शादी हुई है मेरी वो तो काशी गया चल
उसी का रास्ता देखूंगी मैं आएगा वो कब भला
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
राजकुमारी ने पिता को सारा सच बता दिया
राजा ने बारात को खाली ही लोटा दिया
उधर लड़का मामा के संग काशी नगरी पहुँच गया
गुरुकुल जाकर विद्या वो पाने में था जुट गया
जिस दिन लड़का सेठ का हुआ बारह वर्ष का
यज्ञ भंडारा चल रहा था समाया बड़ा था हर्ष का
और लड़के ने अचानक मामा से आकर कहा
मेरी तबियत ठीक नहीं उसने घबराकर कहा
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
मामा के कहने पर वो अंदर जा कर सो गया
मामा ने आकर जब देखा वो मुर्दा था हो गया
ये देखके मामा को हुआ बड़ा ही दुःख था
रोना धोना नहीं किया बंद किये वो मुख था
सोच रहा था बाहर वो पता यदि चल जाएगा
सफल भंडारा ना होगा कोई कुछ ना खाएगा
चुपचाप उसने सारा भंडारा था निपटाया
भांजा मेरा नहीं रहा बाद में था चिल्लाया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
उसके रोने की आवाज़ आ रही थी जहां से
भोले बाबा पार्वती विचर रहे थे वहाँ से
पास जाकर देखा माता पार्वती हैरान हुई
बालक है ये सेठ का सोचकर परेशान हुई
पार्वती माँ बोली हे स्वामी इसका कष्ट हरो
मृत पड़ा है बालक जो इसको जीवित आप करो
भोले बाबा बोले देवी ऐसा ना हो पाएगा
आयु अपनी जी चुका अब ना वापिस आएगा
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
पार्वती माँ बोली इसके प्राण जो ना आएंगे
बालक के माता पिता तड़प तड़प मर जाएंगे
ये सब सुनकर भोले बाबा ने फिरसे वरदान दिया
सेठ के उस बालक को लंबा जीवन दान दिया
फिर वो लड़का और मामा दोनों वापिस चल दिये
रस्ते में फिर यज्ञ कराए बड़े बड़े भंडार किए
जहां हुई थी शादी उसकी नगर वो ही फिर आया
राजा को जब पता चला उनको महलों में लाया
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
राजा बोला लड़के से तू ही मेरा जमाई है
मेरी कन्या की संग तेरे होनी आज विदाई है
बड़े प्रेम से राजा ने उनका आदरमान किया
हाथी घोड़े दास दासियाँ और बड़ा धन दान दिया
अपने घर जब वो लड़का दुल्हन लेकर आता है
उससे पहले मामा उसके घर बतलाने जाता है
इधर सेठ और सेठानी छत पर चढ़े होते हैं
अपनी जान देने को दोनों खड़े होते हैं
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
बाल हमारा घर आया तो तब ही नीचे आएंगे
बुरी खबर जो आई तो छत से कूद जाएंगे
शपथपूर्वक मामा ने उनको जब था समझाया
जल्दी से वो आए नीचे मन था उनका हर्षाया
वह बेटे को घर लाए अपने लगाकर सीने वो
मिलजुलकर सारे लगे खुशी खुशी से जीने वो
सोमवार की व्रत कथा शिव ने जो सुनाई है
सोनू सागर क्या लिखता शिव ने ही लिखवाई है
श्रद्धा से जो सुनता है वो सदगति को जाएगा
वो परिवार समेत शिव महिमा का गुणगान करेगा
सुनो सुनो जी कथा सुनो सोमवार की कथा सुनो
सोमवार व्रत कथा | Somvar Vrat Katha | SHIV BHARDWAJ | Shiv Katha | Full 4K Video
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Shiv Katha: Somvar Vrat Katha
Singer: Shiv Bhardwaj
Music Director: Jatinder Jeetu
Lyrics: Traditional, Sonu Saagar
Album: Somvar Vrat Katha
Singer: Shiv Bhardwaj
Music Director: Jatinder Jeetu
Lyrics: Traditional, Sonu Saagar
Album: Somvar Vrat Katha
यह कथा एक सेठ की है जो भगवान शिव के परम भक्त थे और हर दिन शिव के मंदिर में पूजा करते थे। हालांकि वह श्रद्धा से पूजा करते थे, फिर भी उन्हें चिंता और मानसिक शांति का अभाव था। उनकी पत्नी ने भगवान शिव से उनकी पीड़ा के बारे में पूछा, तो शिव ने बताया कि सेठ के घर संतान नहीं है और उसके बाद उनका खानदान नहीं चलेगा। माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि सेठ को संतान मिलनी चाहिए और शिव ने उसे वरदान दिया कि उसे पुत्र मिलेगा, लेकिन उसकी आयु केवल बारह वर्ष होगी।
कुछ समय बाद सेठ की पत्नी गर्भवती हुई और सेठ ने यह खुशी छुपाई। जब उनका पुत्र हुआ, तो सेठ चिंतित था क्योंकि उसे शिव द्वारा दिए गए वरदान का खयाल था। एक दिन सेठ ने अपने बेटे को काशी पढ़ने भेजने का फैसला किया और रास्ते में यज्ञ करवाने के लिए कहा। रास्ते में, एक नगर के राजा ने एक काना लड़का देखा और सोचा कि उसे अपनी बेटी के साथ शादी करवा दी जाए। लड़के के मामा को मनाया गया, और वह लड़का राजा के साथ शादी में शामिल हो गया।
जब सेठ का बेटा बारह साल का हुआ, तब उसे मृत्यु का सामना करना पड़ा। सेठ के मामा ने दुखी होकर पूरे भंडारे को बिना किसी को खाए समाप्त किया। बाद में, माता पार्वती ने भगवान शिव से सेठ के बेटे को जीवन दान देने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उस बच्चे को जीवन दान दिया और उसे लंबी उम्र दी।
इसके बाद, लड़का और उसका मामा वापस लौटे, और राजा ने लड़के को अपनी बेटी से शादी के लिए स्वीकार किया। सेठ और उसकी पत्नी अपनी जान देने के लिए छत पर चढ़ गए थे, लेकिन मामा ने उन्हें समझाया और वह खुशी खुशी जीवन जीने लगे। इस कथा के माध्यम से भगवान शिव की भक्ति, आस्था और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश दिया गया है।
कुछ समय बाद सेठ की पत्नी गर्भवती हुई और सेठ ने यह खुशी छुपाई। जब उनका पुत्र हुआ, तो सेठ चिंतित था क्योंकि उसे शिव द्वारा दिए गए वरदान का खयाल था। एक दिन सेठ ने अपने बेटे को काशी पढ़ने भेजने का फैसला किया और रास्ते में यज्ञ करवाने के लिए कहा। रास्ते में, एक नगर के राजा ने एक काना लड़का देखा और सोचा कि उसे अपनी बेटी के साथ शादी करवा दी जाए। लड़के के मामा को मनाया गया, और वह लड़का राजा के साथ शादी में शामिल हो गया।
जब सेठ का बेटा बारह साल का हुआ, तब उसे मृत्यु का सामना करना पड़ा। सेठ के मामा ने दुखी होकर पूरे भंडारे को बिना किसी को खाए समाप्त किया। बाद में, माता पार्वती ने भगवान शिव से सेठ के बेटे को जीवन दान देने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उस बच्चे को जीवन दान दिया और उसे लंबी उम्र दी।
इसके बाद, लड़का और उसका मामा वापस लौटे, और राजा ने लड़के को अपनी बेटी से शादी के लिए स्वीकार किया। सेठ और उसकी पत्नी अपनी जान देने के लिए छत पर चढ़ गए थे, लेकिन मामा ने उन्हें समझाया और वह खुशी खुशी जीवन जीने लगे। इस कथा के माध्यम से भगवान शिव की भक्ति, आस्था और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश दिया गया है।
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Author - Saroj Jangir
आपका स्वागत है भजनों के इस विशाल संग्रह में. आप इस ब्लॉग पर भजनों की केटेगरी को यहाँ क्लिक (भजन केटेगरी पेज) करके खोज सकते हैं. मेरे इस ब्लॉग पर आपको कई उपयोगी लेख मिलेंगे यथा आयुर्वेद, धर्म, जीवन शैली आदि। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक सहज तरीके से पहुंचाना है। मैंने इस ब्लॉग पर कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें भजन, धार्मिक कथा कहानी, जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें। |
