मेरे साहा मै हर दरसन सुख होए भजन
मेरे साहा मै हर दरसन सुख होए भजन
मेरे साहा मै हर दरसन सुख होए ॥
हमरी बेदन तू जानता साहा अवर किआ जानै कोए ॥रहाउ॥
साचा साहिब सच तू मेरे साहा तेरा कीआ सच सभ होए ॥
झूठा किस कउ आखीऐ साहा दूजा नाही कोए ॥१॥
हमरी बेदन तू जानता साहा अवर किआ जानै कोए ॥रहाउ॥
साचा साहिब सच तू मेरे साहा तेरा कीआ सच सभ होए ॥
झूठा किस कउ आखीऐ साहा दूजा नाही कोए ॥१॥
सभना विच तू वरतदा साहा सभ तुझह धिआवह दिन रात ॥
सभ तुझ ही थावहो मंगदे मेरे साहा तू सभना करह इक दात ॥२॥
सभ को तुझ ही विच है मेरे साहा तुझ ते बाहर कोई नाहे ॥
सभ जीअ तेरे तू सभस दा मेरे साहा सभ तुझ ही माहे समाहे ॥३॥
सभना की तू आस है मेरे पिआरे सभ तुझह धिआवह मेरे साह ॥
जिउ भावै तिउ रख तू मेरे पिआरे सच नानक के पातसाह ॥४॥
Mere Saha Main Har Darshan Sukh Hoy Bhajan-Mere Shaha Main Har Darsan Sukh Hoye || Bani Guru Ramdas Ji || Niranjan Saar ||
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प्रभु की दृष्टि में सुख और शांति का सागर है, जो हर भक्त के मन को तृप्त करता है। वह सच्चा साहिब है, जो हमारी हर वेदना को जानता है, और उसका हर कार्य सत्य से ओतप्रोत है। सृष्टि में कोई दूसरा नहीं, केवल वही हर जगह व्याप्त है। सभी प्राणी दिन-रात उसी को याद करते हैं, और उसकी कृपा से ही सबकी इच्छाएँ पूरी होती हैं। जैसे हर जीव उसी में समाया है, वैसे ही वह सबका आधार और आश्रय है। यह विश्वास मन को बल देता है कि प्रभु की इच्छा में ही सब कुछ है, और उसकी शरण में हर भक्त की पुकार सुन ली जाती है। सच्ची भक्ति यही है कि उसकी मर्जी में रमकर जीवन को उसके हवाले कर दें।
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नाम दा गहना पाया गुरां ने
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Author - Saroj Jangir
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