कोई श्याम मनोहर लेले रे कृष्णा भजन

कोई श्याम मनोहर लेले रे भजन

कोई श्याम मनोहर ले ले रे
सिर धर मटकिया फोड़ी रे,
कोई श्याम मनोहर ले ले रे ।
दधि को नाम बिसरि गईं ग्वालिन,
हरि लो हरि लो बोलैं रे ।
कोई श्याम मनोहर ले ले रे ।
कृष्ण के रूप धरी हैं ग्वालिन,
औरहिं औरहिं बोलै रे ।
कोई श्याम मनोहर ले ले रे ।
 मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,
हेरि भई फिरि हेरो रे ।
कोई श्याम मनोहर ले ले रे ।
सिर धर मटकिया फोड़ी रे,
कोई श्याम मनोहर ले ले रे ।

Koi Shyam Manohar le lo - Pt. Chhannulal Mishra

Koee Shyaam Manohar Le Le Re
Sir Dhar Matakiya Phodee Re,
Koee Shyaam Manohar Le Le Re .
Dadhi Ko Naam Bisari Gaeen Gvaalin,
Hari Lo Hari Lo Bolain Re .
Koee Shyaam Manohar Le Le Re .
Krshn Ke Roop Dharee Hain Gvaalin,
Aurahin Aurahin Bolai Re .
Koee Shyaam Manohar Le Le Re .
Meera Ke Prabhu Giridhar Naagar,
Heri Bhee Phiri Hero Re .
Koee Shyaam Manohar Le Le Re .
Sir Dhar Matakiya Phodee Re,
Koee Shyaam Manohar Le Le Re . 
 
प्रेम का ऐसा रंग चढ़ा कि ग्वालिनें सब कुछ भूल गईं। सिर पर मटकी लिए, दही बेचने की सुध खोकर, बस श्याम के नाम में डूब गईं। हरि का नाम जपते हुए, उनका मन उस मनोहर रूप में खो गया, जैसे नदी सागर में मिल जाए। कृष्ण का वह रंग-रूप ऐसा कि ग्वालिनें आपस में बस उसी की बातें करती हैं, एक-दूसरे को उसी का स्मरण कराती हैं। मीरा का मन भी गिरिधर के उस नागर स्वरूप में रम गया, बार-बार उनकी छवि को निहारने को आतुर है। यह प्रेम का बंधन है, जो मन को संसार की माया से मुक्त कर, श्याम की भक्ति में लीन कर देता है।
 
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