मेरा शीष गुरु चरणा ते टिकाया भजन
मेरा शीष गुरु चरणा ते टिकाया भजन
सुंदर मूर्ति नूं हिरदय च समाया रहन दे
नित उठ के सवेरे करिये याद गुरां नूं,
मन विषया विकारां तो हटाया रहन दे
मेरा शीष गुरु चरणा ते टिकाया रहन दे,
सुंदर मूर्ति नूं हिरदय च समाया रहन दे
दुनिया भोलिये नी, की जाणें प्रेम रस नूं,
मैनूं प्रेम दा अनोखा रस आया रहन दे
डिगदे हंजुआं दे नाल धोवां चरण गुरां दे,
मेरियां अखियां दा चशमा बहाया रहन दे
मेरी ज़िंदगी बसंत दी बहार हो गई,
मेरे हिरदय दे फुल्लां नूं चढ़ाया रहन दे
उस दाता दे दर ते उमंग आ गई,
उसदे दर उत्ते पलड़ा बिछाया रहन दे
Sundar Moorti Noon Hiraday Ch Samaaya Rahan De
Nit Uth Ke Savere Kariye Yaad Guraan Noon,
Man Vishaya Vikaaraan To Hataaya Rahan De
Mera Sheesh Guru Charana Te Tikaaya Rahan De,
Sundar Moorti Noon Hiraday Ch Samaaya Rahan De
Duniya Bholiye Nee, Kee Jaanen Prem Ras Noon,
Mainoon Prem Da Anokha Ras Aaya Rahan De
Digade Hanjuaan De Naal Dhovaan Charan Guraan De,
Meriyaan Akhiyaan Da Chashama Bahaaya Rahan De
Meree Zindagee Basant Dee Bahaar Ho Gaee,
Mere Hiraday De Phullaan Noon Chadhaaya Rahan De
Us Daata De Dar Te Umang Aa Gaee,
Usade Dar Utte Palada Bichhaaya Rahan De
मन गुरु के चरणों में रम जाए, यही सच्ची साधना है। उनकी पावन मूर्ति हृदय में बस जाए, जैसे चाँदनी रात में तारे चमकते हैं। हर प्रभात उनकी स्मृति मन को शुद्ध करे, संसार के भटकाव से मुक्त रखे। दुनिया प्रेम के रस को कहाँ समझे, पर यह रस मन को अनंत आनंद देता है। आँसुओं से गुरु के चरण पखारें, आँखों का वह स्रोत अनवरत बहे। जीवन अब बसंत का मेला है, हृदय के फूल उनके चरणों में अर्पित हों। उनके दर पर उत्साह का सागर उमड़ता है, वहाँ मन का हर भार समर्पित हो। यह गुरु भक्ति का पथ है, जहाँ प्रेम और निष्ठा ही जीवन का संगीत बनते हैं।
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Author - Saroj Jangir
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