मुझे अपनी शरण में ले लो राम
मुझे अपनी शरण में ले लो राम
मुझे अपनी शरण में ले लो राम।।
लोचन मन में जगह ना हो तो,
जुगल चरण में ले लो राम, ले लो राम,
मुझे अपनी शरण में ले लो राम।।
जीवन देकर जाल बिछाया,
रच के माया नाच नचाया।।
चिंता मेरी तभी मिटेगी,
जब चिंतन में ले लो राम, ले लो राम,
मुझे अपनी शरण में ले लो राम।।
तुमने लाखों पापी तारे,
मेरी बारी, बाज़ी हारे।।
मेरे पास न पुण्य की पूंजी,
पद पूजन में ले लो राम, ले लो राम,
मुझे अपनी शरण में ले लो राम।।
घर-घर अटकूं, दर-दर भटकूं,
कहाँ-कहाँ अपना सिर पटकूं।।
इस जीवन में मिलो न तुम तो,
राम हे राम, मुझे मरण में ले लो राम, ले लो राम,
मुझे अपनी शरण में ले लो राम।।
मुझे अपनी शरण में ले लो राम | भगवन राम जी भजन | जुगलचरण | Jugalcharan by Devin Sharma (Full HD)
राम की शरण की पुकार वह हृदय की गहरी तड़प है, जो संसार के मायाजाल से मुक्ति की कामना करती है। भक्त का मन, जो प्रभु के चरणों में स्थान माँगता है, वह निश्छल प्रेम है, जो कहता है—यदि मन में जगह न हो, तो चरणों की धूल में ही ठौर दे दो। यह भक्ति वह दीप है, जो अंधेरे में भी प्रभु का मार्ग दिखाता है।
संसार का यह जाल, माया का नाच, चिंता का बोझ—ये सब तब मिटते हैं, जब मन राम के चिंतन में डूब जाता है। प्रभु ने असंख्य पापियों को तारा, फिर मेरी बारी क्यों न आए? यह विश्वास कि पुण्य की पूँजी न सही, पर चरणों की पूजा ही कल्याणकारी है, वह शक्ति देता है, जो हर भय को हर लेती है।
घर-घर, दर-दर भटकता मन, जब तक राम का साथ न पाए, तब तक ठिकाना नहीं पाता। यह प्रार्थना कि जीवन में न सही, तो मरण में ही शरण दे दो, वह समर्पण है, जो प्रभु के बिना अधूरा है। यह प्रेम वह नदी है, जो राम के चरणों में बहती हुई, आत्मा को उनकी कृपा में डुबो देती है, और जीवन को उनके रंग से सराबोर कर देती है।