शिव का रूप सलोना भेरव देता सब सोगाते
शिव का रूप सलोना भेरव देता सब सोगाते
शिव का रूप सलोना, भैरव देता सब सौगाते।।
दर्शन मात्र से पूरी होती, सबकी सारी मुरादे।।
शिव का रूप सलोना, भैरव देता सब सौगाते।।
तीन लोक में डंका बाजे, तीन नेत्र वाले भैरव का।।
इनसे बड़ा फ़कीर न कोई, शानी नहीं इनके भेष का।।
मन की बात पूरी कर दे, मन की बात पहचाने।।
शिव का रूप सलोना, भैरव देता सब सौगाते।।
भक्त जो इनके मन भा जाए, उनको न कोई जग में रोके।।
अंत समय जो काशी जाए, परम धाम को वो तो पहुंचे।।
काशी नगरी पूरी कर दे, भगत जो सपने संजोते।।
शिव का रूप सलोना, भैरव देता सब सौगाते।।
दर्शन मात्र से पूरी होती, सबकी सारी मुरादे।।
शिव का रूप सलोना, भैरव देता सब सौगाते।।
तीन लोक में डंका बाजे, तीन नेत्र वाले भैरव का।।
इनसे बड़ा फ़कीर न कोई, शानी नहीं इनके भेष का।।
मन की बात पूरी कर दे, मन की बात पहचाने।।
शिव का रूप सलोना, भैरव देता सब सौगाते।।
भक्त जो इनके मन भा जाए, उनको न कोई जग में रोके।।
अंत समय जो काशी जाए, परम धाम को वो तो पहुंचे।।
काशी नगरी पूरी कर दे, भगत जो सपने संजोते।।
शिव का रूप सलोना, भैरव देता सब सौगाते।।
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