काल चक्र चक्की चले बहुत दिवस और रात अगुन सगुन दोई पाटला तामे जीव पिसाय एक दिन ऐसा होयगा कोई कहु का नाय घर की नारी कोकहे तन की नारी जाय मंदिर माहि झलकति दिया की सी जोत हंस बटाउ चली गया
काडी घड की खोट अब थारो कई पतियारो रे परदेशी हाँ रे हां अब थारो कई पतियारो दुरादेशी मायला जब लग तेले दिया माय रे बाती थारा मंदरिया में हुया उजियारा रे रे परदेशी हां रे हां मायला कुटी गया तेल बुझण लागि बाती हाँ रे हां
Prahlad Singh Tipaniya Bhajan Lyrics in Hindi
मायला कुटी गया तेल बुझण लागि बाती हाँ रे हां थारा मंदरिया में होयाअँधियारा रे परदेशी हाँ रे हां मायला ढस गयी भीत पड़न लागी टाटी हाँ रे हां मायला ढस गयी भीत पड़न लागी टाटी हाँ रे हां थारी टाटी (छप्पर ) में मिल गयी रे माटी रे परदेशी हाँ रे हां मायला घाट घडी रो सांटो (गन्ना ) यो मीठो
हाँ रे हां यो तो घाट घाट को रस न्यारो रे परदेशी हाँ रे हां मायला उठी चल्यो बाणियो सुनी थारी हाटड़ी (दूकान ) हाँ रे हां मायला उठी चल्यो बाणियो सुनी थारी हाटड़ी (दूकान ) दे ताळो ने ले गया कूंची (चाबी ) रे परदेशी हाँ रे हां अब थारो कई पतियारो दुरादेशी मायला कहे हो कबीर सा सुनो भाई साधो हाँ रे हां मायला कहे हो कबीर सा सुनो भाई साधो हाँ रे हां थारो हंसो अमरापुर जासी रे परदेशी हाँ रे हां थारो कई पतियारो रे परदेशी हाँ रे हां