छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा राजस्थानी सोंग
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा राजस्थानी सोंग
इस राजस्थानी लोक गीत में एक लड़की अपने पिता से कहती है की अभी उसके विवाह की उमर नहीं थी। उसका क्या दोष है की उसके विवाह में जल्दी की गयी। उसका विवाह जल्दी क्यों कर दिया। उसका हर कदम उसे अपने पिता से दूर करता जा रहा है इसी दौरान उसके बचपन की यादें भी ताजा होती चली जा रही हैं और इसमें वह इनके बारे में बताती है। इस लोक गीत को आप अनुप्रिया लखावत की आवाज में सुनिए।
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
हो.........
इतरा दिना तो म्हाने लाड लडाया
अब क्यों करो सा म्हाने दूर
हो.........
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
थारे पिपलिएरी भोली मैं चिड़कली
थे चाहो तो उड़ जाऊ सा
मैं तो बाबोसा थारे खूंटे री गावडली
ठोरो जठे ही ठुर जाउला
भेजो तो भेजो बाबुल
मरजी है थारी
सावन में बुलाई ज्यो जरुर
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
थां घर जन्मी थां घर खेली
अब घर भेजो दूजे
ओ...........
आगे बढूँ तो पग पाछा पड़े
म्हारो कालजीयो थर थर धूजे
मुंडे (मुंह से) सू (से) काईं बोला
म्हारा आन्सुडा बोले
हिवड़ो भरयो है भरपूर
ओ...........
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
संग की सहेल्या आवो आपां गले मिल ल्या
फेरु कद मिलणु होवे सा
भाई भाभी मावडली सू जाऊ मैं बिछड के
आँखड़लिया म्हारी रोवे सा
ओ..............
काईं कराँ म्हाने तो निभानो पडेगो
दुनिया को यो दस्तूर
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
हो.........
इतरा दिना तो म्हाने लाड लडाया
अब क्यों करो सा म्हाने दूर
हो.........
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
काईं थारो करयो मैं कसूर
काईं थारो करयो मैं कसूर
हो.........
इतरा दिना तो म्हाने लाड लडाया
अब क्यों करो सा म्हाने दूर
हो.........
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
थारे पिपलिएरी भोली मैं चिड़कली
थे चाहो तो उड़ जाऊ सा
मैं तो बाबोसा थारे खूंटे री गावडली
ठोरो जठे ही ठुर जाउला
भेजो तो भेजो बाबुल
मरजी है थारी
सावन में बुलाई ज्यो जरुर
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
थां घर जन्मी थां घर खेली
अब घर भेजो दूजे
ओ...........
आगे बढूँ तो पग पाछा पड़े
म्हारो कालजीयो थर थर धूजे
मुंडे (मुंह से) सू (से) काईं बोला
म्हारा आन्सुडा बोले
हिवड़ो भरयो है भरपूर
ओ...........
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
संग की सहेल्या आवो आपां गले मिल ल्या
फेरु कद मिलणु होवे सा
भाई भाभी मावडली सू जाऊ मैं बिछड के
आँखड़लिया म्हारी रोवे सा
ओ..............
काईं कराँ म्हाने तो निभानो पडेगो
दुनिया को यो दस्तूर
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
हो.........
इतरा दिना तो म्हाने लाड लडाया
अब क्यों करो सा म्हाने दूर
हो.........
छोटी सी उमर परणाई ये बाबो सा
काईं थारो करयो मैं कसूर
काईं थारो करयो मैं कसूर
Chhoti Si Umar || Rajasthani Folksong || Anupriya Lakhawat || Kapil Jangir || Momin
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Lyrics: Traditional, Music: Kapil Jangir, Sarangi: Momin Khan