वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे भजन

वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे भजन

 वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे,
हारे हैं प्राण जिसने, लेकिन वचन ना हारे।।
वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे।।

जननी ऐ जन्मभूमि, हिम्मत से काम लेना,
चौदह बरस हैं ग़म के, इस दिल को थाम लेना,
बिछड़े तो फिर मिलेंगे, हम अंश हैं तुम्हारे।।
वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे।।

प्यारे चमन के फूलों, तुम हौसला ना छोड़ो,
इन आँसुओं को रोको, ममता के तार तोड़ो,
लौटेंगे दिन ख़ुशी के, एक साथ जो गुज़ारे।।
वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे।।

इसमें है दोष किसका, उसकी यही रज़ा है,
होकर वही रहेगा, किस्मत में जो लिखा है,
कब तक यह करी है होनी किसी के टारे।।
वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे,
हारे हैं प्राण जिसने, लेकिन वचन ना हारे।।
वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे।।


वनवास जा रहे हैं रघुवंश के दुलारे...बेहद भावपूर्ण भजन ! Sung By Dhiraj Kant. 8010788843
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