बाबा मत संख बजावै पुजू तेरे पाँव रे भजन

बाबा मत संख बजावै पुजू तेरे पाँव रे कृष्णा भजन

इस भजन का सन्दर्भ है की जब भगवान शिव श्री कृष्ण की बाल लीला को देखने के लिए गोकुल में जाते हैं लेकिन माता यसोदा के द्वारा यह कहने पर की कृष्ण तो सो रहे हैं और उन्हें देखकर दर जाएंगे, इस भर भोलेनाथ जी जोर जोर से शँख बजाने लग जाते हैं।

बाबा मत संख बजावै पुजू तेरे पाँव रे Baba Mat Sankh Bajave Puju Tere Paanv Re Lyrics-Prakash Rutha

बाबा मत संख बजावै, पुजू तेरे पाँव  रे,
पालना में सोवे मेरो, जग जायगो लाल रै,

अलख जगायो नन्द बाबा के, कृपा मुनि भारी है,
वो ही भी देउँ क्या नाथ जो इच्छा तुम्हारी है,
कमी नहीं है धन की, थाली लाऊँ भोजन की,
करूँ ना अबार रे (देर करना ),
पालना में सोवे मेरो, जग जायगो लाल रै,
पालना में सोवे मेरो, जग जायगो लाल रै,

धन और दौलत हमें ना चाहिए, एक लालसा लाया हूँ,
तेरे लाला के दर्शन करने, बड़ी दूर से आया हूँ,
बड़ी दूर से आया हूँ, मैं बड़ी दूर से आया हूँ,
भिक्षा माँगे सन्यासी, मैं हूँ पर्वत कैलाशी,
ये गोकुल सौ गाँव रै,
पालना में सोवे तेरो, जग जायगो लाल रै,
पालना में सोवे तेरो, ज़ग जायगो लाल रै,
बाबा मत संख बजावै, भोले मत शंख बजावै,
बाबा मत संख बजावै, पुजू तेरे पाँव  रे,
पालना में सोवे मेरो, जग जायगो लाल रै,

तू तो बाबा दर्शन करके, अपनी गैल (राह) पकड़ जायेगो,
तेरे रूप को देखकर के मेरो कन्हैया डर जायेगो,
बातन को फंदा डारे, डरपे गो देख तुम्हारें,
ये कारे कारे नाग रे,
पालना में सोवे मेरो, जग जायगो लाल रै,
पालनाँ में सोवे मेरो, जग जायगो लाल रै,

धरनो देउँ रमा देउँ धूणी, पूरण कर दे आशा को,
बिन दर्शन किये लाला के, ना जाऊँ कैलाशा को,
मैं ना जाऊँ कैलाशा को,
बाबा ने धरनों दीनों, मोहन ने नाटक कीन्हों,
दर्शन जी भर कर लीन्हों, ये सोच मैं तमाम रै,
पालना में सोवे मेरो, जग जायगो लाल रै,
पालना में सोवे मेरो, जग जायगो लाल रै,


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भजन - बाबा मत शंख बजावे पूजूँ तेरे पॉंव रे || Baba Mat Shankh Bajaave || Prakash Rootha
Song - Baba Mat Shankh Bajaave Pooju Tere Paaon Re
Singer - Prakash Rootha
Album - Krishan Janam Leela Vol-1
Music - Basant & Party
Writer - Ramesh Chand 

दर्शन करके तो बाबा अपनी राह पकड़ लेंगे, लेकिन मेरे कन्हैया को डर लगेगा – वो रूप देखकर, बातों में फंदा डालकर, कारे नाग की तरह डर जाएंगे। इसलिए धरना देता हूँ, रमा देता हूँ, धूनी लगाता हूँ – आशा पूरी कर दो, बिना दर्शन के कैलाश नहीं लौटूँगा। जैसे कोई भूखा यात्री घर पहुँचकर कहे कि बिना खाए नहीं जाऊँगा, वैसे ही ये समर्पण है। बाबा ने धरना दिया, मोहन ने नाटक किया, और आखिर दर्शन जी भर कर लिए – ये सोचकर मन भर आता है। पालने में सोया लाल जग जाएगा, लेकिन तब तक दिल में बस वो प्रेम रहता है। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की।


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