मुझे मेरी मैया ने बहुत कुछ दिया है भजन
मुझे मेरी मैया ने बहुत कुछ दिया है भजन
(मुखड़ा)
मुझे मेरी मैया ने बहुत कुछ दिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
(अंतरा)
मुझे है सहारा तेरी बंदगी का,
यही है गुजारा मेरी जिंदगी का,
उसे क्या कमी, जो तेरा हो गया है,
उसे क्या कमी, जो तेरा हो गया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
मिला मुझको सब कुछ,
बदौलत तुम्हारी,
मेरा कुछ नहीं,
सब दौलत तुम्हारी,
ये बंदा तो तेरे दर से जिया है,
ये बंदा तो तेरे दर से जिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
तेरा शुक्रिया, तूने दर पे बुलाया,
सोया नसीबा, ये तुमने जगाया,
ज़माने का हर सुख मुझको मिला है,
ज़माने का हर सुख मुझको मिला है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
किया कुछ नहीं, अब तो शर्मसार हूँ मैं,
तेरी रहमतों का कर्जदार हूँ मैं,
दिया कुछ नहीं, बस लिया ही लिया है,
दिया कुछ नहीं, बस लिया ही लिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
(पुनरावृत्ति)
मुझे मेरी मैया ने बहुत कुछ दिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
मुझे मेरी मैया ने बहुत कुछ दिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
(अंतरा)
मुझे है सहारा तेरी बंदगी का,
यही है गुजारा मेरी जिंदगी का,
उसे क्या कमी, जो तेरा हो गया है,
उसे क्या कमी, जो तेरा हो गया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
मिला मुझको सब कुछ,
बदौलत तुम्हारी,
मेरा कुछ नहीं,
सब दौलत तुम्हारी,
ये बंदा तो तेरे दर से जिया है,
ये बंदा तो तेरे दर से जिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
तेरा शुक्रिया, तूने दर पे बुलाया,
सोया नसीबा, ये तुमने जगाया,
ज़माने का हर सुख मुझको मिला है,
ज़माने का हर सुख मुझको मिला है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
किया कुछ नहीं, अब तो शर्मसार हूँ मैं,
तेरी रहमतों का कर्जदार हूँ मैं,
दिया कुछ नहीं, बस लिया ही लिया है,
दिया कुछ नहीं, बस लिया ही लिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
(पुनरावृत्ति)
मुझे मेरी मैया ने बहुत कुछ दिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया माँ, बड़ा शुक्रिया है।
दुखों में भी मुस्कुरा कर गाया करें ये भजन || Mata Rani Bhajan || Kumar Sagar
मां ने जीवन में जो कुछ दिया, वो अनमोल तोहफा है, हर कदम पर सहारा बने रहना। बंदगी का यही गुजारा है, कमी का क्या सवाल जिसने अपना बना लिया। बदौलत उनकी ही सब मिला, नसीब जागा दर पर बुलाकर, जमाने का सुख बरसाया। कर्जदार तो हूँ शर्मिंदा सा, बस लिया ही लिया कुछ न दिया। इश्वर का आशीर्वाद है, जो हर रहमत बरसाता रहता।
भक्ति का रंग चढ़ा तो जीवन सुगंधित हो गया, हर सांस में शुक्रिया गूंजे। हमें सिखाते हैं कि सच्चा बंधन कर्ज चुकाने से परे बसता, दिल से पुकारो तो सब मिल जाए। जरा नम्र हो जाओ इस प्यार में, थकान मिट जाए। आप सब पर इश्वर की कृपा बनी रहे, दिल को छू ले ऐसी शांति मिले।