नमन साईं नाथ हे भव भेह दुःख हारी
नमन साईं नाथ हे भव भेह दुःख हारी
नमन साईं नाथ, हे भव भय दुख हारी,
नमन शिर्डी स्वामी, हे जग त्रिपुरारी।
तिहारी, तिहारी शरण है तिहारी,
नमन साईं नाथ, हे भव भय दुख हारी।।
तिहारे भरोसे ही हम तो हैं बाबा,
तू ही हमको काशी, तू ही हमको काबा।
जिए जा रहे हैं दया पे तुम्हारी,
तुम ही राम राघव, तुम ही हो मुरारी।
तिहारी, तिहारी शरण है तिहारी,
नमन साईं नाथ, हे भव भय दुख हारी।।
दया की नज़र कर, हे करुणा के सागर,
रहम हम पर भी कर, हे स्वामी, दया कर।
संतों के तुम संत, झोली न खाली,
करे ध्यान चरणों का सृष्टि ये सारी।
तिहारी, तिहारी शरण है तिहारी।।
अर्ज़ हो, अमर हो, तुम अंतर्यामी,
हो मालिक जगत, साईं शिर्डी स्वामी।
कृपालु, दयालु, परम उपकारी,
करते हो पल-पल परवाह हमारी।
तिहारी, तिहारी शरण है तिहारी,
नमन साईं नाथ, हे भव भय दुख हारी।।
नमन शिर्डी स्वामी, हे जग त्रिपुरारी।
तिहारी, तिहारी शरण है तिहारी,
नमन साईं नाथ, हे भव भय दुख हारी।।
तिहारे भरोसे ही हम तो हैं बाबा,
तू ही हमको काशी, तू ही हमको काबा।
जिए जा रहे हैं दया पे तुम्हारी,
तुम ही राम राघव, तुम ही हो मुरारी।
तिहारी, तिहारी शरण है तिहारी,
नमन साईं नाथ, हे भव भय दुख हारी।।
दया की नज़र कर, हे करुणा के सागर,
रहम हम पर भी कर, हे स्वामी, दया कर।
संतों के तुम संत, झोली न खाली,
करे ध्यान चरणों का सृष्टि ये सारी।
तिहारी, तिहारी शरण है तिहारी।।
अर्ज़ हो, अमर हो, तुम अंतर्यामी,
हो मालिक जगत, साईं शिर्डी स्वामी।
कृपालु, दयालु, परम उपकारी,
करते हो पल-पल परवाह हमारी।
तिहारी, तिहारी शरण है तिहारी,
नमन साईं नाथ, हे भव भय दुख हारी।।
Naman Sai Natha I KAVITA PAUDWAL I Sai Kardo Karam I Full Audio Song
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Sai Bhajan:Naman Sai Natha
Singer: Kavita Paudwal
Music Director: Bijender Chauhan
Lyricist: JITENDRA RAGHUVANSHI
Album Name: Sai Kardo Karam
Singer: Kavita Paudwal
Music Director: Bijender Chauhan
Lyricist: JITENDRA RAGHUVANSHI
Album Name: Sai Kardo Karam
साईं के प्रति भक्त की गहरी श्रद्धा और उनकी शरण में समर्पण का भाव एक ऐसी अनुभूति को जन्म देता है, जो हृदय को प्रभु की करुणा और प्रेम से परिपूर्ण करता है। यह भाव उस अटल विश्वास को दर्शाता है कि साईं ही वह परम शक्ति हैं, जो संसार के हर दुख और भय को हर लेते हैं। उनकी कृपा भक्त के लिए वह आधार है, जिसके भरोसे वह जीवन की हर कठिनाई को पार करता है। साईं की दया का सागर इतना विशाल है कि वह हर भक्त की पुकार सुनता है और उसकी झोली को प्रेम, शांति और सुख से भर देता है। उनकी शरण में आने वाला भक्त यह अनुभव करता है कि साईं ही सभी धर्मों और रूपों में एक हैं, जो हर प्राणी के लिए समान रूप से कृपालु और दयालु हैं, और जिनके चरणों में सारी सृष्टि नतमस्तक है।
साईं की महिमा और उनका दयालु स्वभाव भक्त को यह सिखाता है कि उनकी करुणा में ही सच्चा सुख और मुक्ति है। यह भाव उस गहन विश्वास को व्यक्त करता है कि साईं अंतर्यामी हैं, जो हर हृदय की बात जानते हैं और हर पल अपने भक्तों की परवाह करते हैं। उनकी कृपा से भक्त का जीवन न केवल दुखों से मुक्त होता है, बल्कि वह आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी बढ़ता है। साईं का दर वह पवित्र स्थान है, जहाँ कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता, और उनकी दया हर उस आत्मा को सहारा देती है, जो सच्चे मन से उनकी शरण में आता है। यह भक्ति और प्रेम भक्त को साईं के चरणों में लीन होने की प्रेरणा देता है, जिससे उसका जीवन सदा उनकी कृपा और मार्गदर्शन से रोशन रहता है।
साईं की महिमा और उनका दयालु स्वभाव भक्त को यह सिखाता है कि उनकी करुणा में ही सच्चा सुख और मुक्ति है। यह भाव उस गहन विश्वास को व्यक्त करता है कि साईं अंतर्यामी हैं, जो हर हृदय की बात जानते हैं और हर पल अपने भक्तों की परवाह करते हैं। उनकी कृपा से भक्त का जीवन न केवल दुखों से मुक्त होता है, बल्कि वह आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी बढ़ता है। साईं का दर वह पवित्र स्थान है, जहाँ कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता, और उनकी दया हर उस आत्मा को सहारा देती है, जो सच्चे मन से उनकी शरण में आता है। यह भक्ति और प्रेम भक्त को साईं के चरणों में लीन होने की प्रेरणा देता है, जिससे उसका जीवन सदा उनकी कृपा और मार्गदर्शन से रोशन रहता है।
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Author - Saroj Jangir
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