तेरे दर पे सिर झुकाया तो जन्नत को पा लिया

तेरे दर पे सिर झुकाया तो जन्नत को पा लिया

तेरे दर पे सिर झुकाया, तो जन्नत को पा लिया,
छोड़ा सारा जहां, तुझको मना लिया।
तेरे दर पे सिर झुकाया, तो जन्नत को पा लिया।।

मस्ती में झूमता हूं मैं, हर घड़ी हर पल,
जब से तुझे है बाबा, अपने दिल में वसा लिया।
छोड़ा सारा जहां, तुझको मना लिया,
तेरे दर पे सिर झुकाया, तो जन्नत को पा लिया।।

तुझसे बड़ा जहां में, कोई रहमदिल नहीं,
तेरी रहमतों का जलवा, मैंने भी पा लिया।
छोड़ा सारा जहां, तुझको मना लिया,
तेरे दर पे सिर झुकाया, तो जन्नत को पा लिया।।

मुश्किल हर इक मेरी, आसान हो गई,
तेरी ज्योत को ऐ बाबा, जब से दिल में वसा लिया।
छोड़ा सारा जहां, तुझको मना लिया,
तेरे दर पे सिर झुकाया, तो जन्नत को पा लिया।।


बेकाबू कर देगा ये भजन : तेरे दर पे सर झुकाया : Tere Dar Pe Sar Jukaya : Latest Sai Bhajan

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About Bhajan -

Song : Tere Dar Pe Sar Jukaya 
Lyrics : Amit
Music : Amit
 
उस परम शक्ति के चरणों में सिर झुकाने से हृदय में एक ऐसी शांति और आनंद का अनुभव होता है, जो स्वर्ग के समान है। जब मन उस शक्ति के प्रेम में डूब जाता है, तो सांसारिक बंधन और चिंताएँ तुच्छ हो जाती हैं, और जीवन एक अनंत मस्ती से भर उठता है। वह शक्ति अपने प्रेम और करुणा से हर पल को आलोकित करती है, जिससे हर क्षण एक उत्सव बन जाता है। यह प्रेम इतना गहरा है कि मनुष्य सारी दुनिया को छोड़कर केवल उसी के रंग में रंग जाता है, और उसका हृदय उस शक्ति के साथ एकाकार हो जाता है।

उस शक्ति की करुणा से बढ़कर इस संसार में कोई और नहीं, जो हर प्राणी पर अपनी रहमत बरसाती है। उसकी कृपा का जलवा जीवन की हर मुश्किल को आसान बना देता है, और उसके प्रकाश को हृदय में बसाने से सारी बाधाएँ दूर हो जाती हैं। यह वह ज्योति है, जो मन को अंधेरे से निकालकर सत्य और प्रेम की राह पर ले जाती है। 

Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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