जय साईं की बोल रे भगता साई भजन
जय साईं की बोल रे भगता साई भजन
जय साईं की बोल रे भगता,
सतकर्मों पे चलना सिखाया।
भटके हुए को राह दिखाया,
मांगो तुम भी झोली फैला के,
वो देगा भंडारे खोल।
जय साईं की बोल रे भगता।।
लेकर रूप फकीरी का,
साईं जोगी आया शिर्डी में,
सबका मालिक एक बताकर,
डूबा वो खुद की मस्ती में।
शिर्डी नगर में धूम मची है,
बज रहे ताशे, ढोल।
जय साईं की बोल रे भगता।।
नगरी-नगरी, द्वारे-द्वारे,
भिक्षा मांगे भगतों से,
जाति-धर्म का भेद नहीं वो,
बंधा है वो प्रेम के रिश्तों से।
राम भी वो, अल्लाह भी वो है,
काहे रह्या है मनवा टोल।
जय साईं की बोल रे भगता।।
शिर्डी में खुशियों की देखो,
साईं घटा निराली है,
जिसपे आई जो भी मुश्किल,
सबकी विपदा टाली है।
साईं महिमा गाते-गाते,
कर जीवन अनमोल।
जय साईं की बोल रे भगता।।
सतकर्मों पे चलना सिखाया।
भटके हुए को राह दिखाया,
मांगो तुम भी झोली फैला के,
वो देगा भंडारे खोल।
जय साईं की बोल रे भगता।।
लेकर रूप फकीरी का,
साईं जोगी आया शिर्डी में,
सबका मालिक एक बताकर,
डूबा वो खुद की मस्ती में।
शिर्डी नगर में धूम मची है,
बज रहे ताशे, ढोल।
जय साईं की बोल रे भगता।।
नगरी-नगरी, द्वारे-द्वारे,
भिक्षा मांगे भगतों से,
जाति-धर्म का भेद नहीं वो,
बंधा है वो प्रेम के रिश्तों से।
राम भी वो, अल्लाह भी वो है,
काहे रह्या है मनवा टोल।
जय साईं की बोल रे भगता।।
शिर्डी में खुशियों की देखो,
साईं घटा निराली है,
जिसपे आई जो भी मुश्किल,
सबकी विपदा टाली है।
साईं महिमा गाते-गाते,
कर जीवन अनमोल।
जय साईं की बोल रे भगता।।
जय साईं की बोल Jai Sai Ki Bol I ARUN MASTER I Sai Bhajan I Full Audio Song
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Sai Bhajan: Jai Sai Ki Bol
Singer: Arun Master
Music Director: J1 Sangeet
Lyricist: Arun Master
Album: Jai Sai Ki Bol
Singer: Arun Master
Music Director: J1 Sangeet
Lyricist: Arun Master
Album: Jai Sai Ki Bol
उस परम शक्ति की महिमा का गुणगान करने से जीवन में सत्कर्म और सही मार्ग की प्रेरणा मिलती है। वह शक्ति भटके हुए मन को राह दिखाती है और उसे सत्य, प्रेम और एकता का पाठ सिखाती है। जब मनुष्य अपनी झोली उस शक्ति के सामने फैलाता है, तो वह अपनी असीम कृपा से उसे सुख, शांति और समृद्धि से भर देती है। यह कृपा ऐसी है, जो हर इच्छा को पूर्ण करती है और जीवन को एक नई दिशा प्रदान करती है। वह शक्ति सादगी और प्रेम के रूप में सभी के बीच रहती है, और उसका आलिंगन हर उस हृदय को प्राप्त होता है, जो सच्चे मन से उसका नाम लेता है।
वह शक्ति, जो साधारण वेश में भी असाधारण कार्य करती है, सभी को यह संदेश देती है कि सृष्टि का मालिक एक है। वह नगरी-नगरी, द्वार-द्वार जाकर प्रेम और करुणा का बंधन जोड़ती है, जिसमें न जाति का भेद है, न धर्म का बंधन। वह प्रेम का ऐसा रिश्ता स्थापित करती है, जो हर मन को एक सूत्र में बांधता है। उसकी महिमा गाते हुए जीवन अनमोल हो जाता है, और हर मुश्किल का समाधान उसकी कृपा से सहज ही मिल जाता है। यह वह शक्ति है, जो अपने प्रेममय वातावरण में सभी को आनंद और शांति से परिपूर्ण करती है, और हर पल को उत्सवमय बना देती है।
वह शक्ति, जो साधारण वेश में भी असाधारण कार्य करती है, सभी को यह संदेश देती है कि सृष्टि का मालिक एक है। वह नगरी-नगरी, द्वार-द्वार जाकर प्रेम और करुणा का बंधन जोड़ती है, जिसमें न जाति का भेद है, न धर्म का बंधन। वह प्रेम का ऐसा रिश्ता स्थापित करती है, जो हर मन को एक सूत्र में बांधता है। उसकी महिमा गाते हुए जीवन अनमोल हो जाता है, और हर मुश्किल का समाधान उसकी कृपा से सहज ही मिल जाता है। यह वह शक्ति है, जो अपने प्रेममय वातावरण में सभी को आनंद और शांति से परिपूर्ण करती है, और हर पल को उत्सवमय बना देती है।
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Author - Saroj Jangir
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