अगर हाथ रख दे मेरे सिर पे साईं

अगर हाथ रख दे मेरे सिर पे साईं

अगर हाथ रख दे मेरे सिर पे साईं,
मुझे फिर किसी की ज़रूरत नहीं है।
अगर हाथ रख दे मेरे सिर पे साईं।।

ये फूलों की दुनिया, ये हारों की दुनिया,
ये लालच में भटके विचारों की दुनिया,
अगर पी सकूँ साईं मस्ती का अमृत,
किसी बेख़ुदी की ज़रूरत नहीं है।
अगर हाथ रख दे मेरे सिर पे साईं।।

दया की है तुमने तो हर बार कर दो,
मेरी ज़िंदगी पे उपकार कर दो,
अगर छोड़ बैठूं मैं दामन तुम्हारा,
तो इस ज़िंदगी की ज़रूरत नहीं है।
अगर हाथ रख दे मेरे सिर पे साईं।।

लुटेरे यहाँ लूट लेते हैं मंदिर,
कभी झांकते नहीं अपने अंदर,
ख़ुदा की ज़रूरत है ऐसी ज़मीन पर,
यहाँ आदमी की ज़रूरत नहीं है।
अगर हाथ रख दे मेरे सिर पे साईं।।

चलेंगे यहाँ से तेरे काम करके,
कमी न रहेगी अंधेरों से डर के,
अगर साथ हो साईं बाबा का दीपक,
किसी रौशनी की ज़रूरत नहीं है।
अगर हाथ रख दे मेरे सिर पे साईं।। 


गुरुवार Special साईं भजन Agar Haath Rak De I ANURADHA PAUDWAL I Sai Bhajan I Full HD Video,Sai Amrit

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About Bhajan -

Sai Bhajan: Agar Haath Rak De
Singer: Anuradha Paudwal
Music Director: PT. P. K. Razdan
Lyricist: PT. P. K. Razdan
Album: Sai Amrit
 
उस परम शक्ति की कृपा का एक स्पर्श ही जीवन को पूर्णता देता है, जिससे सांसारिक चाहतें और आवश्यकताएँ तुच्छ हो जाती हैं। यह प्रेम और करुणा का वह आलिंगन है, जो मन को मस्ती के अमृत से सराबोर कर देता है, और उसे लालच व भटकन की दुनिया से मुक्त करता है। जब मनुष्य उस शक्ति के प्रति समर्पित होकर उसके सान्निध्य में डूबता है, तो उसे किसी और सुख या बाहरी आनंद की आवश्यकता नहीं रहती। उसका हृदय केवल उस शक्ति की मस्ती में खो जाता है, और वह हर सांस में उसकी उपस्थिति का अनुभव करता है, जो जीवन को एक नई रोशनी और अर्थ प्रदान करती है।

उस शक्ति की दया इतनी अपार है कि वह बार-बार अपने प्रेम से जीवन को उपकृत करती है। वह मनुष्य को कभी उसका दामन छोड़ने नहीं देती, और यदि मन भटक भी जाए, तो वह उसे फिर से अपने चरणों में लाती है। इस संसार में, जहाँ लोग बाहरी चमक-दमक में खोए रहते हैं और अपने भीतर झाँकना भूल जाते हैं, उस शक्ति की उपस्थिति ही सच्चा सहारा बनती है। उसका साथ एक दीपक की तरह है, जो अंधेरे को चीरकर मार्ग दिखाता है, और जीवन को सत्कर्मों से संवारता है। यह विश्वास और प्रेम का वह बंधन है, जो हर कदम पर साथ देता है, और मन को यह अहसास कराता है कि उस शक्ति की कृपा के सामने किसी और रोशनी की जरूरत नहीं।

Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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