बड़ा है दयालु भोले नाथ डमरू वाला भजन
बड़ा है दयालु भोले नाथ डमरू वाला भजन
शिव समान दाता नहीं,
विपत निवारण हार,
लज्जा सबकी राखियो,
ओ नंदी के असवार।।
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला,
जिनके गले में विषधर काला,
नीलकंठ वाला,
भोलेनाथ डमरू वाला,
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला।।
(अंतरा)
बैठे पर्वत धुनि रमाए,
बदन पड़ी मृगछाला है,
कालों के महाकाल सदाशिव,
जिनका रूप निराला है,
उनकी गोदी में गजानन लाला,
ओ नीलकंठ वाला,
भोलेनाथ डमरू वाला,
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला।।
(अंतरा)
शीश चंद्रमा, जटा में गंगा,
बदन पे भस्मी चोला है,
तीन लोक में नीलकंठ-सा,
देव ना कोई दूजा है,
पी गए, पी गए विष का प्याला,
ओ नीलकंठ वाला,
भोलेनाथ डमरू वाला,
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला।।
(पुनरावृत्ति)
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला,
जिनके गले में विषधर काला,
नीलकंठ वाला,
भोलेनाथ डमरू वाला,
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला।।
विपत निवारण हार,
लज्जा सबकी राखियो,
ओ नंदी के असवार।।
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला,
जिनके गले में विषधर काला,
नीलकंठ वाला,
भोलेनाथ डमरू वाला,
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला।।
(अंतरा)
बैठे पर्वत धुनि रमाए,
बदन पड़ी मृगछाला है,
कालों के महाकाल सदाशिव,
जिनका रूप निराला है,
उनकी गोदी में गजानन लाला,
ओ नीलकंठ वाला,
भोलेनाथ डमरू वाला,
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला।।
(अंतरा)
शीश चंद्रमा, जटा में गंगा,
बदन पे भस्मी चोला है,
तीन लोक में नीलकंठ-सा,
देव ना कोई दूजा है,
पी गए, पी गए विष का प्याला,
ओ नीलकंठ वाला,
भोलेनाथ डमरू वाला,
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला।।
(पुनरावृत्ति)
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला,
जिनके गले में विषधर काला,
नीलकंठ वाला,
भोलेनाथ डमरू वाला,
बड़ा है दयालु भोलेनाथ डमरू वाला।।
सोमवार स्पेशल - भगवान शिव के इस भजन को जिस घर मेँ सुनते हैं उस घर में सदा धन सुख समृद्धि बढ़ती हैं |
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भोलेनाथ, नीलकंठ, वह दयालु देवता हैं, जिनकी कृपा से हर भक्त की लज्जा रक्षित होती है और हर विपत्ति का निवारण हो जाता है। उनके गले में विषधर सर्प, जटा में गंगा, और बदन पर भस्म का चोला उनकी अनुपम और निराली छवि को दर्शाता है। पर्वत पर ध्यानमग्न, मृगछाला धारण किए, डमरू की ध्वनि से तीनों लोकों को तृप्त करने वाले महाकाल की महिमा अपार है। उनकी गोद में गजानन जैसे पुत्र और नंदी जैसे असवार के साथ वे भक्तों के लिए सदा सुलभ हैं। उनकी दया ऐसी है कि वे विष का प्याला पीकर भी नीलकंठ बन गए, जो संसार के लिए उनके त्याग और करुणा का प्रतीक है।
भोलेनाथ की भक्ति भक्त के हृदय को शांति और शक्ति से भर देती है। उनकी जय-जयकार तीनों लोकों में गूंजती है, क्योंकि उनके समान कोई दूसरा दाता नहीं। चाहे वह संकट हो या दुख, भोलेनाथ की कृपादृष्टि हर बाधा को दूर करती है। उनकी सादगी और महिमा भक्तों को उनके चरणों में नतमस्तक होने के लिए प्रेरित करती है। यह वह पवित्र बंधन है, जो भक्त को भोलेनाथ के प्रेम में डुबो देता है, और उनके आशीर्वाद से जीवन हर दृष्टि से मंगलमय और सार्थक हो जाता है।
भोलेनाथ की भक्ति भक्त के हृदय को शांति और शक्ति से भर देती है। उनकी जय-जयकार तीनों लोकों में गूंजती है, क्योंकि उनके समान कोई दूसरा दाता नहीं। चाहे वह संकट हो या दुख, भोलेनाथ की कृपादृष्टि हर बाधा को दूर करती है। उनकी सादगी और महिमा भक्तों को उनके चरणों में नतमस्तक होने के लिए प्रेरित करती है। यह वह पवित्र बंधन है, जो भक्त को भोलेनाथ के प्रेम में डुबो देता है, और उनके आशीर्वाद से जीवन हर दृष्टि से मंगलमय और सार्थक हो जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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