फूल हाजूरी खिली रे ज्वानी बान छे क्या बान मा
फूल हाजूरी खिली रे ज्वानी बान छे क्या बान मा
फूल हाजूरी खिली रे, ज्वानी बान छे क्या बान मा,
द्वी नगे की फूली, नाखे मा झुमका झूली कान मा।
ना पंद्रा पच्चीस की लागछी ज्वानी बीस की,
भली बतुनी चट-बटा, लागछी भोते नटखटा।
हो हो हो हो...
फूल हाजूरी खिली रे, ज्वानी बान छू मै बान मा,
द्वी नगे की फूली, नाखे मा झुमका झूली कान मा।
द्वी बीसी उमर मेरी, मैं छू पहाड़ों की चेली,
घट्टी-मटी चाहा पिलोलू, चूल मै धरी रो कितेली।
हो हो हो हो...
चार चूड़ी, मै द्वी कांगन, खुट मा पायल छम-छमा,
म्योर पहाड़ी पिछोड़ी ओडी, हल्का कमर ठूम-ठुमा। (×2)
एक-दो-तीन मै अघिल बे, तू पछिन मै,
हाथ पकड़ हिट मेरो और नाच मास्क बीन मै।
हो हो हो...
अरे मै नाचुली, त्यार दगड़ हल्के कमर तोड़ी की,
नो-नो चूड़ी म्यार हाथ मा, ख्वार पिछोड़ी ओडी की।
नो गजे धमेली, कमर घागरी घुमुलो फरा-फर,
बाजलो मस्कबीन और दगड़ मै दमों नांगार।
हो हो हो...
ढाई हाथे धमेली, लागि रे टोन त्यारा फोन का,
जो जाग तू जा छे छोरी, वा खिली जे रौनक। (×2)
मूल-मूल यो त्यार प्योर पहाड़ी त्यर फैंसन,
आजकल पहाड़ फन, त्वे देखी बे ले रो मन।
हो हो...
हा, मेरी ज्वानी फ्योली जैसी, सबू की नजर म्यपार,
बीन किरिम पोडर लगाई, मुखड़ी मै रु निखर।
पहाड़ी नथुली नाखेम, काल सुरुमा रु आखूम,
झुप-झुपी बुलाक कानुमा, खुट पेजेबी छूमा-छूम।
हो हो हो...
पालूरी डाला फ्योली जैसी, हाय रे ज्वानी रूम झूमा,
हल्की जानी झुमुका तेरी, जब ही ट छे ठूम-टूमा।
ना कोशी को धार मै, अल्मोड़ा बजार मै,
हाई-हेलो तू के गै छे, दिन ऊ एयतवार मै।
हो हो...
द्वी नगे की फूली, नाखे मा झुमका झूली कान मा।
ना पंद्रा पच्चीस की लागछी ज्वानी बीस की,
भली बतुनी चट-बटा, लागछी भोते नटखटा।
हो हो हो हो...
फूल हाजूरी खिली रे, ज्वानी बान छू मै बान मा,
द्वी नगे की फूली, नाखे मा झुमका झूली कान मा।
द्वी बीसी उमर मेरी, मैं छू पहाड़ों की चेली,
घट्टी-मटी चाहा पिलोलू, चूल मै धरी रो कितेली।
हो हो हो हो...
चार चूड़ी, मै द्वी कांगन, खुट मा पायल छम-छमा,
म्योर पहाड़ी पिछोड़ी ओडी, हल्का कमर ठूम-ठुमा। (×2)
एक-दो-तीन मै अघिल बे, तू पछिन मै,
हाथ पकड़ हिट मेरो और नाच मास्क बीन मै।
हो हो हो...
अरे मै नाचुली, त्यार दगड़ हल्के कमर तोड़ी की,
नो-नो चूड़ी म्यार हाथ मा, ख्वार पिछोड़ी ओडी की।
नो गजे धमेली, कमर घागरी घुमुलो फरा-फर,
बाजलो मस्कबीन और दगड़ मै दमों नांगार।
हो हो हो...
ढाई हाथे धमेली, लागि रे टोन त्यारा फोन का,
जो जाग तू जा छे छोरी, वा खिली जे रौनक। (×2)
मूल-मूल यो त्यार प्योर पहाड़ी त्यर फैंसन,
आजकल पहाड़ फन, त्वे देखी बे ले रो मन।
हो हो...
हा, मेरी ज्वानी फ्योली जैसी, सबू की नजर म्यपार,
बीन किरिम पोडर लगाई, मुखड़ी मै रु निखर।
पहाड़ी नथुली नाखेम, काल सुरुमा रु आखूम,
झुप-झुपी बुलाक कानुमा, खुट पेजेबी छूमा-छूम।
हो हो हो...
पालूरी डाला फ्योली जैसी, हाय रे ज्वानी रूम झूमा,
हल्की जानी झुमुका तेरी, जब ही ट छे ठूम-टूमा।
ना कोशी को धार मै, अल्मोड़ा बजार मै,
हाई-हेलो तू के गै छे, दिन ऊ एयतवार मै।
हो हो...
Phool Hajuri | New Kumauni Song 2024 | Mahesh Kumar & Maya Upadhyay | Shweta Mahara & Najir Husen |
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Admin - Saroj Jangir
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