लगा दो सखी मैया को काजल को टीको भजन

लगा दो सखी मैया को काजल को टीको भजन


लगा दो सखी मैया को,
काजल का टीका,
सखी लगा दो टीका,
सखी लगा दो टीका,
लगा दो सखी मैया को,
काजल का टीका।

सुंदर मुखड़ा नज़र न लागे,
सुंदर मुखड़ा नज़र न लागे,
रूप चाँद को फीका,
लगा दो सखी मैया को,
काजल का टीका।

शीश मुकुट माथे पर बिंदिया,
शीश मुकुट माथे पर बिंदिया,
पहराए परम पवित्रा,
लगा दो सखी मैया को,
काजल का टीका।

मेंहदी महावर कुमकुम रोली,
मेंहदी महावर कुमकुम रोली,
लाल है मैया जी को,
लगा दो सखी मैया को,
काजल का टीका।

चढ़े नारियल लाल चुनरिया,
चढ़े नारियल लाल चुनरिया,
जलता दीपक घी का,
लगा दो सखी मैया को,
काजल का टीका।

लगा दो सखी मैया को,
काजल का टीका,
सखी लगा दो टीका,
सखी लगा दो टीका,
लगा दो सखी मैया को,
काजल का टीका।


माता भजन - लगा दो सखी मईया को काजल को टीको - Dimpal Bhumi Bhajan | Devi Bhajan | Mata Bhajan Song

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नवरात्रि के पावन त्योहार में माँ को सुंदरता से सजाना, जैसे कि काजल, टीका, मेहंदी, चुनरिया आदि देना, भक्त और देवी के बीच गहरे आत्मीय संबंध की अभिव्यक्ति है। माँ के इस श्रृंगार से उनके दरबार की शोभा बढ़ती है और भक्तों का मन तृप्त होता है। यह सजावट केवल बाहरी ही नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और भक्ति की भी निशानी है, जिससे भक्तों को माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और वे अपने जीवन में खुशहाली, समृद्धि और शांति का अनुभव करते हैं। ऐसे धार्मिक रीति-रिवाज माँ के प्रति भक्त की निष्ठा और प्रेम की गवाही देते हैं।
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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