अब के नवरात्रो में माँ मैं भी तेरे दर पे आऊं
अब के नवरात्रो में माँ मैं भी तेरे दर पे आऊं
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं,
मैं भी तेरे दर पे आऊं,
तेरी पावन ज्योत जगाऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
मेरी अर्ज सुनो महारानी,
माँ तू है जगकल्याणी,
देवों ने यश है गाया,
तेरी महिमा वेद बखानी,
तेरी कृपा हो जाए माँ,
पौड़ी-पौड़ी चलकर आऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
राजा अकबर भी मैया,
था नंगे पैरों आया,
तूने शीश झुकाकर उसका,
ध्यानु का मान बढ़ाया,
करके तेरी भक्ति माँ,
मैं भी ध्यानु सा यश पाऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
इस बार के नवरात्रों में,
माँ सुन ले मेरी अर्जी,
करता है विनती ‘कुंदन’,
आगे माँ तेरी मर्जी,
अगले नवरात्रों में माँ,
मैं परिवार के संग आऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं,
मैं भी तेरे दर पे आऊं,
तेरी पावन ज्योत जगाऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
मैं भी तेरे दर पे आऊं,
मैं भी तेरे दर पे आऊं,
तेरी पावन ज्योत जगाऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
मेरी अर्ज सुनो महारानी,
माँ तू है जगकल्याणी,
देवों ने यश है गाया,
तेरी महिमा वेद बखानी,
तेरी कृपा हो जाए माँ,
पौड़ी-पौड़ी चलकर आऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
राजा अकबर भी मैया,
था नंगे पैरों आया,
तूने शीश झुकाकर उसका,
ध्यानु का मान बढ़ाया,
करके तेरी भक्ति माँ,
मैं भी ध्यानु सा यश पाऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
इस बार के नवरात्रों में,
माँ सुन ले मेरी अर्जी,
करता है विनती ‘कुंदन’,
आगे माँ तेरी मर्जी,
अगले नवरात्रों में माँ,
मैं परिवार के संग आऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं,
मैं भी तेरे दर पे आऊं,
तेरी पावन ज्योत जगाऊं,
अब के नवरात्रों में माँ,
मैं भी तेरे दर पे आऊं।
नवरात्री स्पेशल भजन - अब के नवरात्रो में माँ में भी तेरे दर पे आऊं - Anjana Arya - Mata Bhajan
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इस भाव में भक्त पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ माँ के चरणों की शरण माँग रहा है, क्योंकि उसे विश्वास है कि माँ के दर के अलावा कोई दूसरा द्वार नहीं है। जीवन में चाहे ज़माना कितना ही बदल जाए, धन-संपत्ति छूट जाए, घर-बार चले जाएं, पर माँ का द्वार सदैव अडिग और सुरक्षित रहता है। हर दुख और पीड़ा को सुनने, सहने और दूर करने वाली वही माता है, जिसके सिवा कोई और सहारा नहीं दिखता। भक्त की यह गहरी आशा है कि माँ का विश्वास टूटे नहीं और उसकी झोली सिर्फ माँ के ही हाथों खुले। यह एक पवित्र दायरा है जहाँ भक्त का पूरा जीवन, उसकी सारी उम्मीदें और आस्था केंद्रित होती हैं, जो उसे शांति और सुरक्षा प्रदान करता है।
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पिया पहलम जाउंगी खाटू में
आज ते पाछे भोलेनाथ ना घोटूँ भँग
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Author - Saroj Jangir
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