सावन का महीना घटाएं घनघोर भजन

सावन का महीना घटाएं घनघोर

सावन का महीना, घटाएं घनघोर,
झूला झूले राधा, झुलावे नंदकिशोर।

गूंज उठी हैं चारों ओर किलकारी,
हँस रही हैं राधा, हँस रहे हैं मुरारी।
ऐसा अद्भुत नजारा, न देखा कहीं और,
झूला झूले राधा, झुलावे नंदकिशोर।

सावन का महीना, घटाएं घनघोर,
झूला झूले राधा, झुलावे नंदकिशोर।

खिल उठी हैं चारों ओर फुलवारी,
नाच रही हैं राधा, नाच रहे हैं बनवारी।
नाच रहे हैं संग में, पपीहा और मोर,
झूला झूले राधा, झुलावे नंदकिशोर।

सावन का महीना, घटाएं घनघोर,
झूला झूले राधा, झुलावे नंदकिशोर।

सोने और चांदी का झूला है बनाया,
हीरे और मोती से झूले को सजाया।
नाच रही हैं सखियाँ, झूले के चारों ओर,
झूला झूले राधा, झुलावे नंदकिशोर।

सावन का महीना, घटाएं घनघोर,
झूला झूले राधा, झुलावे नंदकिशोर।



सावन का महीना, घटाएं घनघोर । झूला झूले राधा, झुलावे नंदकिशोर ।। #radhekrishna #krishna #radhe

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सावन का महीना प्रकृति और प्रेम का एक अनूठा संगम है, जहां घनघोर मेघों की छांव में हर तरफ हरियाली और उल्लास बिखर जाता है। यह वह समय है जब प्रकृति अपने पूर्ण यौवन में होती है, और उसकी गोद में प्रेम का एक अलौकिक दृश्य साकार होता है। राधा और कृष्ण की यह दिव्य लीला, जहां वे एक साथ झूले पर झूलते हैं, मन को एक आध्यात्मिक आनंद से भर देती है। यह दृश्य केवल बाहरी सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मा और परमात्मा के बीच के उस पवित्र प्रेम का प्रतीक है, जो हर भक्त के हृदय में एक गहरी चाह जगाता है। चारों ओर गूंजती किलकारियां और प्रकृति का नृत्य इस प्रेम की गहराई को और बढ़ा देता है, मानो सारी सृष्टि इस दिव्य मिलन का उत्सव मना रही हो।
 
 
Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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