हे करूणा की सागर हे ममतामयी माँ
हे करूणा की सागर हे ममतामयी माँ
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ,
मैं तेरा हूँ माता, मुझे तुम संभालो।
मैं चरणों में तेरे आन पड़ा हूँ,
जगत के भँवर से मुझे तुम निकालो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
तेरा नाम है दाती, दीन दयाला,
है लाखों को तूने भँवर से निकाला।
हूँ मैं भी तो मईया उन्हीं से बिछुड़ा,
हूँ फूल जैसे कोई डाली से उखड़ा।
जगत की तपिश से मैं मुरझा न जाऊँ,
मुझे भी माँ अब तो गोदी बिठा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
तुम्हें ना पुकारूँ तो किसको पुकारूँ,
मैं सपनों में मईया तेरी छवि निहारूँ।
हो पतितों की रक्षक, मेरी मात अम्बे,
तू है भक्तवत्सल, तू ही जगदम्बे।
दयामई दाती, दया अब तू कर दे,
कि दास किंचन को अब माँ बचा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
जगत के झमेलों ने मुझको रुलाया,
जो है सच्ची प्रीति उसी को भुलाया।
ना दर-दर भटकना मुझे अब भवानी,
हैं दिल में जो बातें तुम्हीं को सुनानी।
मुझे अपनी यादों के अश्रु माँ दे दो,
माँ अपने ही आंचल में मुझको छुपा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
तेरे नाम की ज्योति हृदय में मेरे,
मेरा ध्यान मईया जी चरणों में तेरे।
परिपक्व हो और कबहूँ ना बिसरे,
तेरी भक्ति करके माँ पल-पल ये निखरे।
तू अपनाकर मुझको माँ अपना ही कर लो,
कि अपने में मईया जी मुझको समा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
माँ की दया की तो सीमा ना होती,
जो बालक मलिन हो तो माँ ही है धोती।
मेरे मन को ऐसा माँ निर्मल बना दो,
मुझे माँ तू अपने ही हाथों सजा दो।
माँ अपने ही काबिल मुझे तुम बना के,
कि भक्ति के पथ पर मुझे माँ चला लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
मैं पापी हूँ मईया, तू है पाप भंजन,
तू कर दे दया माँ, तू कर दे निरंजन।
तू भोली, तेरे भोले-भाले भंडारी,
वो नंदी पे बैठे, तू सिंह पे सवारी।
तू भक्तों की मईया, तू भूलें भुलाये,
मेरे पाप को माँ तू दिल से भुला दे।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
माँ तेरी इच्छा से ये संसार सारा,
करी तूने करूणा, मुझे है पुकारा।
जहाँ रखना, अपनी लग्न में ही रखना,
मुझे तेरी भक्ति का रस है माँ चखना।
मैं मईया तेरा हूँ, तेरा ही रहूँगा,
मेरे चित्त को अपने में माता लगा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
मैं तेरा हूँ माता, मुझे तुम संभालो।
मैं चरणों में तेरे आन पड़ा हूँ,
जगत के भँवर से मुझे तुम निकालो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
तेरा नाम है दाती, दीन दयाला,
है लाखों को तूने भँवर से निकाला।
हूँ मैं भी तो मईया उन्हीं से बिछुड़ा,
हूँ फूल जैसे कोई डाली से उखड़ा।
जगत की तपिश से मैं मुरझा न जाऊँ,
मुझे भी माँ अब तो गोदी बिठा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
तुम्हें ना पुकारूँ तो किसको पुकारूँ,
मैं सपनों में मईया तेरी छवि निहारूँ।
हो पतितों की रक्षक, मेरी मात अम्बे,
तू है भक्तवत्सल, तू ही जगदम्बे।
दयामई दाती, दया अब तू कर दे,
कि दास किंचन को अब माँ बचा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
जगत के झमेलों ने मुझको रुलाया,
जो है सच्ची प्रीति उसी को भुलाया।
ना दर-दर भटकना मुझे अब भवानी,
हैं दिल में जो बातें तुम्हीं को सुनानी।
मुझे अपनी यादों के अश्रु माँ दे दो,
माँ अपने ही आंचल में मुझको छुपा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
तेरे नाम की ज्योति हृदय में मेरे,
मेरा ध्यान मईया जी चरणों में तेरे।
परिपक्व हो और कबहूँ ना बिसरे,
तेरी भक्ति करके माँ पल-पल ये निखरे।
तू अपनाकर मुझको माँ अपना ही कर लो,
कि अपने में मईया जी मुझको समा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
माँ की दया की तो सीमा ना होती,
जो बालक मलिन हो तो माँ ही है धोती।
मेरे मन को ऐसा माँ निर्मल बना दो,
मुझे माँ तू अपने ही हाथों सजा दो।
माँ अपने ही काबिल मुझे तुम बना के,
कि भक्ति के पथ पर मुझे माँ चला लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
मैं पापी हूँ मईया, तू है पाप भंजन,
तू कर दे दया माँ, तू कर दे निरंजन।
तू भोली, तेरे भोले-भाले भंडारी,
वो नंदी पे बैठे, तू सिंह पे सवारी।
तू भक्तों की मईया, तू भूलें भुलाये,
मेरे पाप को माँ तू दिल से भुला दे।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
माँ तेरी इच्छा से ये संसार सारा,
करी तूने करूणा, मुझे है पुकारा।
जहाँ रखना, अपनी लग्न में ही रखना,
मुझे तेरी भक्ति का रस है माँ चखना।
मैं मईया तेरा हूँ, तेरा ही रहूँगा,
मेरे चित्त को अपने में माता लगा लो।
हे करूणा की सागर, हे ममता मई माँ...
हे करूणा की सागर हे ममतामयी माँ Maninder JI BHAJAN VAISHNO DEVI
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Admin - Saroj Jangir
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