जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी , निज भक्तन के तुमने, पूर्ण कारज करे , ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ............।
रत्नसिंहासन राजत, सेवक भक्त खड़े, खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योत जरे , ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ............।
राम मंदिर का सपना, तुमने प्रभु दीना , मंदिर तीन शिखर का, निर्मित है कीना , ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ............। ,
आत्मा ज्ञान विरागी, सम दृष्टि धारी , माया मोह विनाशक, ज्ञान ज्योति जारी , ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ............।
जल में भीनं कमल जो, घर में बाल यति , राज पाठ सब त्यागे, ममता मोह हती , ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ............।
श्री ब्रह्मानन्द जी की आरती , जो कोई नर गावे गवत दास ललित गेरा, मनवांछित फल पावे ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ............।
Om Tatsat aarti जय ब्रह्मानन्द गिरी जी लिरिक्स ब्रह्मानन्द गिरी आरती