होरी आई वृन्दावन खेले गोरी

होरी आई वृन्दावन खेले गोरी

होरी आई रे, होरी आई रे,
होरी आई, ब्रिन्दावन खेले गोरी,
होली आई रे, होली आई रे,
होली आई, वृन्दावन खेले गोरी,

भागन तेआयो है फागण महीना,
कबहू प्रेम की होरी भई ना,
हृदय की आशा लता खिली है
उमगी उमगी रसधारा बही है,
खूब चली पिचकारी रे,
पिचकारी चला दो भर जोरी,
होरी आई रे, होरी आई रे,
होरी आई, ब्रिन्दावन खेले गोरी,
होली आई रे, होली आई रे,
होली आई, वृन्दावन खेले गोरी,

गोरी रंगीली होरी खेलन को आओ,
सोलह शृंगार कर खेलन पधारों,
ढोलक मंजीरा और झांझ बजाओ,
सखियाँ की सेना लेके,
नाचन को आओ,
घर घर से बन आई बन आई,
सकल बृज की गोरी,
होरी आई रे, होरी आई रे,
होरी आई, ब्रिन्दावन खेले गोरी,
होली आई रे, होली आई रे,
होली आई, वृन्दावन खेले गोरी,

जा जा निर्मोही छैला मोह से ना करो बात,
छलियाँ निर्मोही तुमको करो धात,
मीठी मीठी बातन से मन ना लुभाओ,
मैं तो हारी मोहे अब न सताओ,
मैंने परख ले चतुराई रे,
चतुराई परख ले अब टोरी,
होरी आई रे, होरी आई रे,
होरी आई, ब्रिन्दावन खेले गोरी,
होली आई रे, होली आई रे,
होली आई, वृन्दावन खेले गोरी,
होरी आई रे, होरी आई रे,
होरी आई, ब्रिन्दावन खेले गोरी,
होली आई रे, होली आई रे,
होली आई, वृन्दावन खेले गोरी।


Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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