प्रभु राम का स्पर्श जो भी पा जाता भजन
प्रभु राम का स्पर्श जो भी पा जाता है भजन
प्रभु राम का स्पर्श,जो भी पा जाता है,
प्रभु राम का स्पर्श,
जो भी पा जाता है,
सारा जीवन उसका,
धन्य हो जाता है,
प्रभुराम का स्पर्श,
जो भी पा जाता है।
ये हर्ष है स्पर्श है,
प्रभु राम का स्पर्श है,
ये हर्ष है स्पर्श है,
प्रभु राम का स्पर्श है।
चाहा ना था हीरे मोती,
चाहा ना था हाथी घोड़ा,
चाहा ना था हीरे मोती,
चाहा ना था हाथी घोड़ा,
जब से पाया हमने,
राम का स्पर्श थोड़ा,
अपनी जिंदगी का घोड़ा,
सरपट दौड़ा दौड़ा,
प्रभु राम का आशीष,
जिस पर हो जाता है,
सारा जीवन उसका,
धन्य हो जाता है,
प्रभु राम का स्पर्श,
जो भी पा जाता है,
प्रभु राम का स्पर्श,
जो भी पा जाता है।
ये हर्ष है स्पर्श है,
प्रभु राम का स्पर्श है,
ये हर्ष है स्पर्श है,
प्रभु राम का स्पर्श है।
हनुमत के चरण छू कर,
राम धुन में मन लगाया,
हनुमत के चरण छू कर,
राम धुन में मन लगाया,
राम जगत के तारण,
अब समझ में आया,
नमन श्री चरणों में उनके,
शीश हम सब ने झुकाया,
जो फिर राम की भक्ति में,
लीन हो जाता है,
सारा जीवन उसका,
धन्य हो जाता है,
सारा जीवन उसका,
धन्य हो जाता है।
प्रभु राम का स्पर्श,
जो भी पा जाता है,
प्रभु राम का स्पर्श,
जो भी पा जाता है,
सारा जीवन उसका,
धन्य हो जाता है,
प्रभुराम का स्पर्श,
जो भी पा जाता है।
ये हर्ष है स्पर्श है,
प्रभु राम का स्पर्श है,
ये हर्ष है स्पर्श है,
प्रभु राम का स्पर्श है।
भजन श्रेणी : राम भजन (Ram Bhajan)
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