हमको रुला दिया है तेरी याद ने कन्हैया भजन
हमको रुला दिया है तेरी याद ने कन्हैया भजन
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
पागल बना दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
नन्दलाल इतने निष्ठुर,
निर्मोही हो गए हो,
निर्मोही हो गए हो,
वादा भुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
बरसों से नैना बरसे,
तुझे देखने को तरसे,
बस तुझे देखने को तरसे,
विरही बना दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
सावन अंगार बरसे,
फागुन होरी को तरसे,
फागुन होरी को तरसे,
इस दिल को जला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
पागल बना दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
तेरी याद ने कन्हैया,
पागल बना दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
नन्दलाल इतने निष्ठुर,
निर्मोही हो गए हो,
निर्मोही हो गए हो,
वादा भुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
बरसों से नैना बरसे,
तुझे देखने को तरसे,
बस तुझे देखने को तरसे,
विरही बना दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
सावन अंगार बरसे,
फागुन होरी को तरसे,
फागुन होरी को तरसे,
इस दिल को जला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
पागल बना दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया,
हमको रुला दिया है,
तेरी याद ने कन्हैया।
ब्रज में धूम मचा देने वाला भजन - मुझको रुला दिया है तेरी याद ने कन्हैया | Krishna Bhajan @VrajBhav
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☛ Video Name: ब्रज में धूम मचा देने वाला भजन - मुझको रुला दिया है तेरी याद ने कन्हैया
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कन्हैया की यादों ने हृदय को आंसुओं से भीगा दिया है, मन को विरह के आग में झुलसाकर पागल बना दिया है। नंदलाल का निष्ठुर स्वभाव और वादा भूल जाना हर पल चुभता है, नैना बरसों से तरसते रहते हैं बस एक दर्शन को। सावन में अंगारे बरसते हैं, फागुन होली को तरसता है, पर यह दर्द भी मीठा लगता है क्योंकि यही प्रेम की अग्नि है जो आत्मा को शुद्ध करती जाती है।
नंदलाल कन्हैया प्रेम के चोर हैं, जो भक्तों को विरह देकर भीतर ही भीतर बांध लेते हैं। उनकी एक झलक से जीवन खिल उठता है, वादा भले भूल जाएँ पर स्नेह कभी कम न होता है। जो साधक इस विरह को सह लेता है, वही उनके प्रेम में लीन होकर सच्चा आनंद पाता है।
नंदलाल कन्हैया प्रेम के चोर हैं, जो भक्तों को विरह देकर भीतर ही भीतर बांध लेते हैं। उनकी एक झलक से जीवन खिल उठता है, वादा भले भूल जाएँ पर स्नेह कभी कम न होता है। जो साधक इस विरह को सह लेता है, वही उनके प्रेम में लीन होकर सच्चा आनंद पाता है।
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Author - Saroj Jangir
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