सूनी पड़ी है गोकुल की गलियां, छल कर के चले गये गोपियों से छलिया, कह गये परसों बिता दिए बरसों, कहे बन गये निरदैया, बता दो उद्धो कब आएंगे कन्हैया।
कण कण पता पता ऊँची डाल डाल रे
कहाँ गये श्याम सलौना, दिल संग खेल गये किये न ख़याल रे जैसे कोई हम है ख़िलौना, कदम की डाल भी लगाए है आस जी कहा गई बंशी की बजैया, बता दो उद्धो कब आएंगे कन्हैया।
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बिलख बिलख के पुकारे राधा रानी भरी भरी अंखियों में पानी, इक पल भी दूर नहींं रहते से हम से कहे सब पहले की कहानी, यमुना किनारे राह निहारे आके कब पकड़ेंगे बैयां, बता दो उद्धो कब आएंगे कन्हैया।
सूनी पड़ी है गोकुल की गलियां, छल कर के चले गये गोपियों से छलिया, कह गये परसों बिता दिए बरसों, कहे बन गये निरदैया, बता दो उद्धो कब आएंगे कन्हैया।
सूनी पड़ी है गोकुल की गलियां | Kab Aayenge Kanhaiya ( उद्धव गोपी संवाद ) Devendra Pathak Ji