तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम ओ मेरे अलबेले राम
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम
ओ मेरे अलबेले राम,
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम
ओ मेरे अलबेले राम।
जो भी करले हम है तुम पार न्योछावर,
दे दो सजा या इनाम,
ओ मेरे अलबेले राम
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम
ओ मेरे अलबेले राम।
हार गया अपनी अकल लड़ा कर,
हार गया अपनी अकल लड़ा कर,
अब अपना सम्भालो इन्तजाम,
ओ मेरे अलबेले राम
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम
ओ मेरे अलबेले राम।
थक भी गया हूँ इस लंबे सफ़र मे
मेरा जीना हुआ है हराम
ओ मेरे अलबेले राम
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम
ओ मेरे अलबेले राम।
तेरी रज़ा मे अब करली है राज़ी
हमे दे दो सजाया एनाम मेरे अलबेले राम
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम
ओ मेरे अलबेले राम।
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम
ओ मेरे अलबेले राम,
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम
ओ मेरे अलबेले राम।
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम ओ मेरे अलबेले राम #dailybhajan #shriram
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