ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे भजन

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे भजन

ये मंत्र है मां चामुण्डा का,
इस में मां शक्ति समाती है,
हर इक चिंता हर इक बाधा,
इसे जपने से मिट जाती है,
नहीं बाल भी बांका हो उसका,
जो सुमिरे इसे मन से सच्चे,
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

जब चंड मुंड महिषासुर का,
इस धरती पर आंतक मचा,
सबको ही सताया असुरों ने,
कोई भक्त ना साधू संत बचा,
तब तुम्हें पुकारा था मईया,
अब संकट में तेरे बच्चे,
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

मां दुर्गति हारिणी दुर्गे ने,
सदा धर्म का साथ निभाया है,
जब जब धरती पर पाप बढ़ा,
मां ने त्रिशूल उठाया है,
दुष्टों का रक्त पिए काली,
और खा गई दुष्टों को कच्चे,
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

हे नमन तुम्हें मां जगदम्बे,
हे नमन तुम्हें मईया काली,
ना तुमसा कोई और हुआ,
तूँ ही सब से शक्तिशाली,
तूँ दया दृष्टि हम पर रखना,
हम सभी तो हैं तेरे बच्चे,
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।


ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः || Vaishno Devi Bhajan | Mata Rani Bhajan | Aarti|beej mantra

जब चंड-मुंड जैसे राक्षस धरती पर कहर बरपाते हैं, तब माँ की पुकार से शक्ति जाग उठती है। हर बाधा मिट जाती है, चिंता का नामोनिशान न रहता। सच्चे मन से नाम लेने वाला बाल भी बाँका नहीं होता। दुर्गा माँ ने धर्म की रक्षा के लिए त्रिशूल उठाया, दुष्टों का संहार किया। काली रूप में रक्त पिया, अधर्म को कुचल दिया। ये किस्से बताते हैं कि माँ की दया हर संकट में ढाल बन जाती है, हमें साहस देती है। जीवन के तूफानों में भी शांति मिलती है।

जगदम्बा माँ सबसे ऊपर हैं, सबकी रक्षा करती हैं। दया की दृष्टि डालती हैं, बच्चों को गले लगा लेती हैं। पाप बढ़े तो स्वयं प्रकट हो जाती हैं, बुराई को जड़ से उखाड़ फेंकती हैं। भक्तों के दिल में बस जाती हैं, हर पल साथ निभाती हैं। हमें सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति प्रेम और भक्ति से आती है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री चामुण्डा माँ जी की। 

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