सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई भजन

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई भजन

सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई,
कहां पाई तोहे कहां पाई,
सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई।

जनकपुरी में तुम्हें,
कभी नहीं देखा,
सोलह साल रह आई,
अंगूठी तोहे कहां पाई,
सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई।

अवधपुरी में तुम्हें,
कभी नहीं देखा,
जिस दिन से बिहा के आई,
अंगूठी तोहे कहां पाई,
सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई।

पंचवटी में तुम्हें,
कभी नहीं देखा,
बारह साल रह आई,
अंगूठी तोहे कहां पाई,
सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई।

लंकापुरी में तुम्हें,
कभी नहीं देखा,
जिस दिन से मैं यहां आई,
अंगूठी तोहे कहां पाई,
सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई।

तुम तो हनुमत,
छोटे बहुत हो,
कैसे करोगे लड़ाई,
अंगूठी तोहे कहां पाई,
सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई।

फिर हनुमत ने,
बल दिखलाया,
सोने की लंका जलाई,
अंगूठी तोहे कहां पाई,
सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई।

सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई,
कहां पाई तोहे कहां पाई,
सुन अंजनी के लाल,
अंगूठी तोहे कहां पाई।

हनुमान जयंती | सुन अंजनी के लाल अंगूठी तुझे कहां पाई | बालाजी भजन - Balaji Bhajan | Preeti Sharma

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