मेरी राधे मेरी राधे मेरी बिगरी बना दे राधे भजन
मेरी राधे मेरी राधे मेरी बिगरी बना दे राधे भजन
मेरी राधे मेरी राधे मेरी बिगरी बना दे राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी अब तो सुधि लो राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी प्रेम अगाधे राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मोहिं निज सेवा दे राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी रूप अगाधे राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी बनि जा ‘कृपालु’ तू राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी अब तो सुधि लो राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी प्रेम अगाधे राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मोहिं निज सेवा दे राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी रूप अगाधे राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी बनि जा ‘कृपालु’ तू राधे।
मेरी राधे मेरी राधे मेरी राधे मेरी राधे | ब्रज रस माधुरी - 3 | Ft.Akhileshwari Didi
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बिगड़ी बन जाती है जब पुकारें राधे को, सुधि ले लें तो प्रेम अगाध बहता है। निज सेवा दे दें तो रूप अगाध दिखता है, कृपालु बन जाएं तो हर दुख दूर हो जाता है। इश्वर का आशीर्वाद जीवन संवार देता है। हर कमी पूरी हो जाती है जब वो सुन लें, प्रेम की धारा में डूब जाते हैं। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राधे जी की।
राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिय सखी और शाश्वत प्रेम की प्रतीक हैं। वे वृंदावन की रानी हैं, जिन्हें ह्लादिनी शक्ति के रूप में जाना जाता है, जो कृष्ण की लीला को पूर्णता प्रदान करती हैं। श्रीमद्भागवत पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और अन्य ग्रंथों में उनका वर्णन भक्ति और प्रेम की ऊंचाई के रूप में मिलता है। राधा जी का जन्म वृषभानु जी और कीर्तिदा के घर रास पूर्णिमा को हुआ, और वे बरसाना में विराजमान हैं।
राधा रानी का प्रेम कृष्ण के प्रति इतना गहन है कि बिना उनके कृष्ण पूर्ण नहीं माने जाते। वे करुणा, कोमलता और भक्ति की देवी हैं, जिनकी कृपा से भक्त निकुंज प्रेम रस को प्राप्त करते हैं। राधा अष्टमी और अन्य व्रतों में उनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है। श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज जैसे संत उनके सरल स्वरूप और प्रसन्न करने के उपायों का वर्णन करते हैं।
राधा रानी का प्रेम कृष्ण के प्रति इतना गहन है कि बिना उनके कृष्ण पूर्ण नहीं माने जाते। वे करुणा, कोमलता और भक्ति की देवी हैं, जिनकी कृपा से भक्त निकुंज प्रेम रस को प्राप्त करते हैं। राधा अष्टमी और अन्य व्रतों में उनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है। श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज जैसे संत उनके सरल स्वरूप और प्रसन्न करने के उपायों का वर्णन करते हैं।
रचयिता : जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
पुस्तक : ब्रज रस माधुरी, भाग-3
पद संख्या : 90
पृष्ठ संख्या : 147
सर्वाधिकार सुरक्षित © जगद्गुरु कृपालु परिषत्
पुस्तक : ब्रज रस माधुरी, भाग-3
पद संख्या : 90
पृष्ठ संख्या : 147
सर्वाधिकार सुरक्षित © जगद्गुरु कृपालु परिषत्
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