कौरव पांडव जुआ खेले शकुनी पासे सोंग

कौरव पांडव जुआ खेले शकुनी पासे फेंक सोंग

दगा किसी का सगा नहीं है,
किया नहीं तो कर देखो,
जिस जिस ने भी दगा किया है,
जाकर उसका घर देखो।

दगा किया था रावण ने,
जब साधु भेस बनाया था,
भिक्षा लेने गया था लेकिन,
सीता ही हर लाया था,
लंका नगरी राख बनाया,
पल भर में हनुमत देखो,
जिस जिस ने भी दगा किया है,
जाकर उसका घर देखो।

कौरव पांडव जुआ खेले,
शकुनी पासे फेंक रहा,
दुर्योधन की चालाकी को,
वो नटनागर देख रहा,
बिना शत्रु के वंश मिटाया,
लीला नटवर की देखो,
जिस जिस ने भी दगा किया है,
जाकर उसका घर देखो।

किसी को धोखा देकर प्यारे,
एक बार खुश हो जाना,
कर्म की अग्नि में जल करके,
फिर जीवन भर पछताना,
सच्चा सुख पाने की खातिर,
भला किसी का कर देखो,
जिस जिस ने भी दगा किया है,
जाकर उसका घर देखो।

दगा किसी का सगा नहीं है,
किया नहीं तो कर देखो,
जिस जिस ने भी दगा किया है,
जाकर उसका घर देखो।


KAURAV PANDAV JUA KHELNE SHAKUNI PASE FEK RAHA 

श्री कृष्ण रुक्मिणी को बताते हैं की कौरवों ने पाण्डवों से सब कुछ छीनने के लिए और उनसे बदला लेने के उद्देश्य से उनके साथ द्यूत का खेल खेलने के लिए बुलाता है और कैसे पांडवों और जिसमें वो एक एक करके हारते जाते हैं। युधिष्ठिर दुर्योधन के साथ चौसर खेलता है जिसमें शकुनि दुर्योधन के जगह पासे फेंकता है और एक एक करके युधिष्ठिर हारता जाता है। विदुर बार बार इस द्यूत क्रीड़ा को रोकने के लिए कहता है लेकिन द्यूत क्रीड़ा नहीं रुकता और युधिष्ठिर अपनी सारी सेना सब कुछ हार जाते हैं। युधिष्ठिर अपने इंद्रप्र्स्थ को भी हार जाता है। 

जब युधिष्ठिर सब हार जाता है तो शकुनि युधिष्ठिर को अपने भाई दाव पर लगाने के लिए कहता है और यदि युधिष्ठिर इस दाव को जित जाता है तो दुर्योधन युधिष्ठिर का जीता सब लौटने की बात करता है। विदुर राजा धृतराष्ट्र को द्यूत क्रीड़ा को रोकने के लिए कहता है। युधिष्ठिर एक एक करके अपने चारों भाइयों को दाव पर लगाता है और सभी को दुर्योधन से हार जाता है और आख़िर में खुद को भी दाव में हार जाता है और पांडव उनके दास बन कर रह जाते हैं।

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