तुम्हारी रज़ा में मेरी रज़ा है भजन

तुम्हारी रज़ा में मेरी रज़ा है भजन


तुम्हारी रज़ा में मेरी रज़ा है,
मज़ा ही मज़ा है।।

कहता है तुझको ये जग सारा,
हारे का सहारा,
दिल को हमारे लगता है प्यारा,
दर्शन तुम्हारा,
जिसने भी दिल से,
तुमको भजा है,
मज़ा ही मज़ा है।

तेरे भरोसे निश्चिंत है बाबा,
परिवार मेरा,
कण-कण में घर के महसूस होता,
तेरा बसेरा,
लहराती छत पर,
तेरी ध्वजा है,
मज़ा ही मज़ा है।

शरण में तुम्हारी जो भी है आया,
उसे अपनाया,
जिसने भी जैसा रिश्ता बनाया,
तूने निभाया,
झूठे जगत को,
जिसने तजा है,
मज़ा ही मज़ा है।

तुझको समर्पित करता है ‘बिन्नू’,
जीवन ये अपना,
चरणों में तेरे विनती यही है,
सदा साथ रहना,
कलियुग में तेरा,
डंका बजा है,
मज़ा ही मज़ा है।

तुम्हारी रज़ा में मेरी रज़ा है,
मज़ा ही मज़ा है।।


Tumhari Raza Me Humari Raza Hai Maja Hi Maja hai - Khatushyam ji Bhajan | Shubham Rupam LIVE

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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