आया रमतोड़ा मदन गोपाल भजन
आया रमतोड़ा मदन गोपाल भजन
आया रमतोड़ा मदन गोपाल,
नारायण घर में जनम लियो॥
उत्तम कुळ पूजनीक जगत में,
बामण दायमां जाण।
उत्तम में उत्तम भळे रे,
सरव सोने वाळी खाण।
नारायण घर में जनम लियो॥
माता गोद भरी मनड़े में,
हालरिया हुलराय।
पलक-पलक मुख-कमल निहारे,
हरख-हरख सुख पाय।
नारायण घर में जनम लियो॥
सोने तारां बन्या पालणां,
रेशम तणिया डोर।
निरख-निरख आनंद उर छावे,
हीवड़े नन्दकिशोर।
नारायण घर में जनम लियो॥
मात हिण्डावै पूत पालण,
काजळिये री कोर।
सुरता लागी रहे लाल में,
धन में जियां चित चोर।
नारायण घर में जनम लियो॥
नणद भोजायां मंगल गावै,
बांधे बांदर माळ।
कानदान हरि रा गुण गावै,
छांड सकळ जंजाळ।
नारायण घर में जनम लियो॥
आया रमतोड़ा मदन गोपाल,
नारायण घर में जनम लियो।
नारायण घर में जनम लियो॥
नारायण घर में जनम लियो॥
उत्तम कुळ पूजनीक जगत में,
बामण दायमां जाण।
उत्तम में उत्तम भळे रे,
सरव सोने वाळी खाण।
नारायण घर में जनम लियो॥
माता गोद भरी मनड़े में,
हालरिया हुलराय।
पलक-पलक मुख-कमल निहारे,
हरख-हरख सुख पाय।
नारायण घर में जनम लियो॥
सोने तारां बन्या पालणां,
रेशम तणिया डोर।
निरख-निरख आनंद उर छावे,
हीवड़े नन्दकिशोर।
नारायण घर में जनम लियो॥
मात हिण्डावै पूत पालण,
काजळिये री कोर।
सुरता लागी रहे लाल में,
धन में जियां चित चोर।
नारायण घर में जनम लियो॥
नणद भोजायां मंगल गावै,
बांधे बांदर माळ।
कानदान हरि रा गुण गावै,
छांड सकळ जंजाळ।
नारायण घर में जनम लियो॥
आया रमतोड़ा मदन गोपाल,
नारायण घर में जनम लियो।
नारायण घर में जनम लियो॥
आया रमतोडा मदन गोपाल नारायणा घर में जलम लियो || हरिराम जी महाराज भजन सुरेश मोहन ठाकराणी मोकलसर
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तेरे आगमन की खबर से घर-आँगन में एक अनकहा उल्लास भर उठता है; हर स्वर में प्रसन्नता झलकती है और माँ की गोद में बसा शिशु जैसे सृष्टि की नयी उम्मीद लेकर आता है। सोने-तारों सी कुलियों में पाले गये बच्चे की नाजुक मुस्कान पर सबका मन खिल उठता है, और रेशमी डोरों में बँधा वह नंदकिशोर पूरे परिवारीय प्रेम का केन्द्र बन जाता है। नाच-गान, भोग-पूजा और मंगल में बंधी माला—ये सब उत्सव नहीं, एक सामूहिक श्रद्धा है जो जीवन की सूनी दीवारों को खुशियों के रंग से भर देती है। माता के प्रेममय हिण्डावों में सुरक्षा की छाया दल-दल हर दुख को तलना देती है और नन्द-भाईयों के गीतों में उस नए जीवन की महिमा गूँज उठती है। इस जन्म से जो आशा और आनंद आता है, वह केवल परिवार का नहीं, परंपरा और पुण्य का भी सजीव प्रमाण बनकर सबके हृदयों में दीप जला देता है।
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Author - Saroj Jangir
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