नाथ कैसे द्रोपदी के चीर बढ़ाए भजन
नाथ कैसे द्रोपदी के चीर बढ़ाए भजन
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
कौरव पांडव मिल आपस में,
जुआ खेल रचाए।
डार कपट का पासा शकुनि,
पांडव राज्य हराए।
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
द्रुपदसुता को बीच सभा में,
नग्न करने को लाए।
द्वारिकानाथ, लाज रख मेरी,
तुम बिन कौन सहाए।
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
दुःशासन ने पकड़ केश से,
चीर बदन से हटाए।
खेंचत-खेंचत अंत न आयो,
अंबर ढेर लगाए।
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
भीष्म, द्रोण, कर्ण, दुर्योधन,
सब मन में शरमाए।
‘ब्रह्मानंद’ जिनके हरि पालक,
तिनको कौन दुखाए।
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
कौरव पांडव मिल आपस में,
जुआ खेल रचाए।
डार कपट का पासा शकुनि,
पांडव राज्य हराए।
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
द्रुपदसुता को बीच सभा में,
नग्न करने को लाए।
द्वारिकानाथ, लाज रख मेरी,
तुम बिन कौन सहाए।
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
दुःशासन ने पकड़ केश से,
चीर बदन से हटाए।
खेंचत-खेंचत अंत न आयो,
अंबर ढेर लगाए।
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
भीष्म, द्रोण, कर्ण, दुर्योधन,
सब मन में शरमाए।
‘ब्रह्मानंद’ जिनके हरि पालक,
तिनको कौन दुखाए।
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
नाथ कैसे द्रौपदी के,
चीर बढ़ाए,
जाको देख सभी विस्माए॥
ब्रह्मानन्द जी रचित ।। मधुर राग ।। Singer Ramesh dadhich
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सभा की भीड़ में जब अपमान की आग भड़क उठी, तो मन का साहस उसी देव-आवाज से लौटा जिसने लज्जा बचाई; वह दृष्टि इतनी कोमल और कटु एक साथ थी कि शत्रु भी दीनता के आगे झुक पड़े। चीर की लज्जा कुरुपता नहीं, पर एक परीक्षा बनकर आई जिसमें नाथ की गरिमा ने न केवल द्रुपदी का आवरण बहाल किया, बल्कि अस्मिता की जीत भी करायी। उस अलौकिक करिश्मे में मानवीय सीमाएँ मिटकर दैवीय न्याय खुला—जो सबने देखा, वे मुग्ध रह गये; भय, अहंकार और अन्याय के साये भाग गये। जब संकट ने सबसे दुर्बल भाव उकसाया, तब उसी नाथ की एक लीला ने सभ्यता और मर्यादा की डोर फिर से थाम ली। यह क्षण केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं था, पर करुणा, सम्मान और सत्य का प्रकट रूप था जिसने सबको विस्मय में डाल दिया।
Provided to YouTube by Super Cassettes Industries Limited
Pahle Shyam Ko Manna · Lakhbir Singh Lakkha
Pehle Shyam Ko Mana
℗ Super Cassettes Industries Limited
Released on: 1998-10-24.
Pahle Shyam Ko Manna · Lakhbir Singh Lakkha
Pehle Shyam Ko Mana
℗ Super Cassettes Industries Limited
Released on: 1998-10-24.
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Author - Saroj Jangir
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