थोड़ा देती है या ज्यादा देती है माता भजन
थोड़ा देती है या ज्यादा देती है माता भजन
(मुखड़ा)
थोड़ा देती है,
या ज्यादा देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
मैया देती है।।
(अंतरा)
हमारे पास जो कुछ है,
इसी की है मेहरबानी,
हमेशा भेजती रहती,
कभी दाना, कभी पानी,
सुख कर देती है,
और दुख हर लेती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है।।
हमेशा भूखे उठते हैं,
कभी भूखे नहीं सोते,
भला तकलीफ कैसे हो,
हमारी मैया के होते,
सुख कर देती है,
और दुख हर लेती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है।।
दिया जो दादी ने हमको,
कभी कर्जा नहीं समझा,
दयालु मैया ने हमको,
हमेशा अपना ही समझा,
सुख कर देती है,
और दुख हर लेती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है।।
हमने बनवारी माँ से,
बड़े अधिकार से माँगा,
दिया है खुश होकर माँ ने,
जब भी सरकार से माँगा,
सुख कर देती है,
और दुख हर लेती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है।।
(पुनरावृति)
थोड़ा देती है,
या ज्यादा देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
मैया देती है।।
थोड़ा देती है,
या ज्यादा देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
मैया देती है।।
(अंतरा)
हमारे पास जो कुछ है,
इसी की है मेहरबानी,
हमेशा भेजती रहती,
कभी दाना, कभी पानी,
सुख कर देती है,
और दुख हर लेती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है।।
हमेशा भूखे उठते हैं,
कभी भूखे नहीं सोते,
भला तकलीफ कैसे हो,
हमारी मैया के होते,
सुख कर देती है,
और दुख हर लेती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है।।
दिया जो दादी ने हमको,
कभी कर्जा नहीं समझा,
दयालु मैया ने हमको,
हमेशा अपना ही समझा,
सुख कर देती है,
और दुख हर लेती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है।।
हमने बनवारी माँ से,
बड़े अधिकार से माँगा,
दिया है खुश होकर माँ ने,
जब भी सरकार से माँगा,
सुख कर देती है,
और दुख हर लेती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है।।
(पुनरावृति)
थोड़ा देती है,
या ज्यादा देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
मैया देती है।।
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