रघुनंदन दीनदयाल हो तुम, श्री राम तुम्हारी जय होवे, राजा राम तुम्हारी जय होवे, दीनानाथ तुम्हारी जय होवे, रघुनाथ तुम्हारी जय होवे, सिया राम तुम्हारी जय होवे, रघुनंदन दीनदयाल हो तुम, श्री राम तुम्हारी जय होवे, राजा राम तुम्हारी जय होवे।
प्रभु तुम ही जानो मेरे पाप और पुण्य, प्रभु तेरे बिना तेरा दास पूरा शून्य, पैरों को लगा दो मेरी पापी इस काया से, हृदय बना शिला मेरी जैसी अहिल्या, सांसों का ये सेतु बस तेरे लिए टीका है, राम सिया बिना मोहे कुछ नहीं दिखता है, बैठा बन शबरी मैं राम पर सुनो,
बेर करूं जूठे कैसे पापी मेरी जिह्वा है, पाने को ना प्रभु हूं जमाने की मैं दौड़ में, जीता हूं मैं त्रेता ये कलयुग छोर के, जैसी जटायु की मिले मुझे मौत, सर मेरा पड़ा हो आपकी ही गोद पे, पैरो को हां धो के पानी मुझको भी पीना है, मन बजरंगी सा चीरा नहीं सीना है, फिर भी ये दास करें इतनी ही मांग, चौदह सालों का वो समय, मुझको भी जीना है।
इक मुकुट तुम्हारे सर सोहे, कानो में कुंडल मन मोहे, गुण शील तुम्हारे जग जाने, रघुनाथ तुम्हारी जय होवे, रघुनंदन दीनदयाल हो तुम, श्री राम तुम्हारी जय होवे,
New Bhajan 2023
राजा राम तुम्हारी जय होवे।
कनक के जैसी मुस्कान को धरे हुए, कीर्तनो में ध्यान नाम पे करे हुए, बल बुद्धि और चेतना से, ध्यान किया रूप का, तो सारे दुख दर्द ये पार हुए।
दुख सुख को समान मान के, सिया राम को बुद्धि का, कमान मान के, एक तीर प्रेम भक्ति का, चला के देखना है, ऐसे राम न मिलेंगे जो, बैठा आराम के सहारे।
चरण धूल पत्थरों को तारे,
सांस भी ये चले राम नाम के सहारे, लोक सृष्टि में तुम, कानो की सांखिया में तुम, जीव बुद्धि के पार, अनंत रूप हैं तिहारे, भजे व्रजैक मंडनम, समस्त पाप खंडनम्, स्व भक्त चित्त रंजनम, है रूप मेरे राम का, दृग अंत क्रांत भंगिनम, सदा सदालि संगिनम, दिनिन नवं नवं, भजु मैं भजन आपका।
कर धनुष सदा और तेज धरे, बन काल सदा दुश्मन तारे, मुनि संतान के रखवारे हो, रघुनाथ तुम्हारी जय हो, रघुनंदन दीनदयाल हो तुम, श्री राम तुम्हारी जय होवे, राजा राम तुम्हारी जय होवे, रघुनंदन दीनदयाल हो तुम, श्री राम तुम्हारी जय होवे, राजा राम तुम्हारी जय होवे।