शिव शंकर चले रे कैलाश की बुंदिया भजन
शिव शंकर चले रे कैलाश की बुंदिया भजन
शिव शंकर चले रे कैलाश,
की बुंदिया पड़ने लगी,
भोले बाबा चले रे कैलाश,
की बुंदिया पड़ने लगी,
गौरा जी ने बोए दई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा ने बोए दई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले......
गौरा जी ने सिच दई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा ने सिच दई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले ...
गौरा जी ने काट लई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा ने काट लई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले ....
गौरा जी ने पीस लई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा ने घोट लई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले .....
गौरा जी की रच गई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा को चढ़ गई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले.......
शिव शंकर चले रे कैलाश,
की बुंदिया पड़ने लगी,
भोले बाबा चले रे कैलाश,
की बुंदिया पड़ने लगी
की बुंदिया पड़ने लगी,
भोले बाबा चले रे कैलाश,
की बुंदिया पड़ने लगी,
गौरा जी ने बोए दई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा ने बोए दई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले......
गौरा जी ने सिच दई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा ने सिच दई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले ...
गौरा जी ने काट लई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा ने काट लई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले ....
गौरा जी ने पीस लई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा ने घोट लई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले .....
गौरा जी की रच गई हरी हरी मेहन्दी,
भोले बाबा को चढ़ गई भांग,
की बुंदिया पड़ने लगी,
शिव शंकर चले.......
शिव शंकर चले रे कैलाश,
की बुंदिया पड़ने लगी,
भोले बाबा चले रे कैलाश,
की बुंदिया पड़ने लगी
भोले बाबा चले कैलाश भजन। शिव भजन। shiv bhajan in hindi। bhole baba chale kailash
गौरा जी ने हरी-हरी मेहंदी बोई, भोले बाबा ने भांग की फसल लगाई, फिर सिची बोली नदियों सा नेह से। काटी तैयार की, पीसी चूर्ण बनाया, रची तो बस लीला ही लीला। इश्वर का आशर्वाद है जो कैलाश चलते वक्त बुंदिया बरसाने लगे, आनंद की बूंदें छिड़क दे। शिव शंकर की ये मस्ती गंगा की धार बन झरे, मन को भिगो दे ऐसी ठंडक से।
भांग चढ़ी तो नाच उठे बाबा, गौरा संग झूमे वो पर्वतों पर। बुंदिया की फुहारों में डूब जाएं, दुनिया भूल हर सुख पा लें। ये प्यार की कहानी दिल को गुदगुदा देती, हर पल नया रंग भर देती। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री भोले शंकर जी।
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