गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार ना कोई चिंता भजन
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार ना कोई चिंता भजन
ओ गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार,ना कोई चिंता ना कोई टेंशन,
अजब निराली सरकार,
ओ गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
ना गौरा तुझे पानी की चिंता,
वाकी जटा में गंगा धार,
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
ना गौरा तुझे बिजली की चिंता,
वाके माथे पर चमके चांद,
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
ना गौरा तुझे महलों की चिंता,
वाको पर्वत ऊपर वास,
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
ना गौरा तेरे सास ननंद है,
ना दबाने पड़ेंगे तुझे पाँव,
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
ना गौरा तेरे दौरानी जिठानी,
ना होगी किसी से राड़,
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
ना गौरा तुझे घूमने की चिंता,
रहे नंदी की सवारी तैयार,
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
ना गौरा तुझे खाने की चिंता,
वह तो खाए धतूरा भांग,
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
मस्त मलंगा वह भीख मंगा,
वह डमरु बजावे दिन रात,
गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार।
GORA TUJHE KAISE MILE BHARTAR।।गोरा तोहै कैसे मिले भरतार बाकी जटा में गंगाधर
गौरा को भरतार कैसे मिले, अजब निराली सरकार है, न चिंता न टेंशन। जटा में गंगा धार है तो पानी की क्या चिंता, माथे पर चांद चमकता है तो बिजली की फिक्र न हो। पर्वत पर वास है तो महलों की जरूरत कहां, इश्वर का आशीर्वाद हर सुख देता है।
सास-ननंद का दबाव न हो, दौरानी-जिठानी से रार न हो, नंदी की सवारी तैयार है तो घूमने की चिंता न रहे। धतूरा-भांग खाते हैं तो भोजन की फिक्र न हो, मस्त मलंग भिख मांगते हैं, डमरू बजाते रहते हैं। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री गौरा जी की।
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